डीएलआई योजना से भारत का सेमीकंडक्टर डिजाइन इकोसिस्टम वैश्विक स्तर पर सशक्त

Sun 04-Jan-2026,11:43 PM IST +05:30

ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |

Follow Us

डीएलआई योजना से भारत का सेमीकंडक्टर डिजाइन इकोसिस्टम वैश्विक स्तर पर सशक्त भारत-का-सेमीकंडक्टर-डिजाइन-इकोसिस्टम
  • डीएलआई योजना भारत में फैबलेस सेमीकंडक्टर डिजाइन को बढ़ावा देकर उच्च मूल्य वर्धन और तकनीकी आत्मनिर्भरता सुनिश्चित कर रही है।

  • चिपइन सेंटर और ईडीए टूल्स से स्टार्टअप व एमएसएमई के लिए चिप डिजाइन की लागत और जोखिम में भारी कमी आई है।

  • डीएलआई समर्थित परियोजनाएँ भारत को वैश्विक चिप डिजाइन वैल्यू चेन में रणनीतिक भागीदार बना रही हैं।

Delhi / New Delhi :

दिल्ली/ भारत जनवरी 2026 में वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला की अस्थिरता और तकनीकी आत्मनिर्भरता की बढ़ती आवश्यकता के बीच अपने सेमीकंडक्टर डिजाइन इकोसिस्टम को रणनीतिक रूप से सशक्त कर रहा है। डिज़ाइन आधारित प्रोत्साहन (DLI) योजना के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के नेतृत्व में स्टार्टअप, एमएसएमई और घरेलू कंपनियों को वित्तीय तथा अवसंरचनात्मक सहयोग दिया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य भारत को केवल सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित न रखते हुए वैश्विक चिप डिज़ाइन नेतृत्व की दिशा में स्थापित करना है।

भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर परिदृश्य में अपनी भूमिका को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है। स्वास्थ्य सेवा, परिवहन, दूरसंचार, रक्षा, अंतरिक्ष और उभरते डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सेमीकंडक्टर चिप अब रणनीतिक संसाधन बन चुके हैं। तेज़ डिजिटलीकरण और स्वचालन के इस दौर में, दुनिया भर में चिप्स की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी पृष्ठभूमि में भारत सरकार ने सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के माध्यम से घरेलू सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को सशक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं।

वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कुछ चुनिंदा देशों तक सीमित है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला अत्यंत संवेदनशील बन गई है। हाल के वर्षों में भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक व्यवधानों ने यह स्पष्ट कर दिया कि विविध और भरोसेमंद मैन्युफैक्चरिंग एवं डिज़ाइन बेस की आवश्यकता है। इसी अवसर को भुनाते हुए भारत स्वयं को एक भरोसेमंद वैश्विक भागीदार के रूप में स्थापित कर रहा है, जहां डिज़ाइन आधारित प्रोत्साहन (DLI) योजना एक केंद्रीय भूमिका निभा रही है।

सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला में चिप डिज़ाइन को सबसे बड़ा मूल्य चालक माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, डिज़ाइन चरण कुल मूल्य वर्धन में लगभग 50 प्रतिशत तक योगदान देता है, जबकि बिल ऑफ मटीरियल्स की लागत में 20 से 50 प्रतिशत और वैश्विक सेमीकंडक्टर बिक्री में 30 से 35 प्रतिशत योगदान फैबलेस सेगमेंट के माध्यम से आता है। यही कारण है कि भारत सरकार ने मैन्युफैक्चरिंग के साथ-साथ फैबलेस चिप डिज़ाइन को भी रणनीतिक प्राथमिकता दी है।

डिज़ाइन आधारित प्रोत्साहन (DLI) योजना को सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम के तहत MeitY द्वारा लागू किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य एक आत्मनिर्भर, नवोन्मेषी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी चिप डिज़ाइन इकोसिस्टम तैयार करना है। यह योजना स्टार्टअप, MSME और घरेलू कंपनियों को वित्तीय प्रोत्साहन के साथ-साथ उन्नत डिज़ाइन इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंच प्रदान करती है, ताकि वे विचार से लेकर सिलिकॉन तक की यात्रा सफलतापूर्वक पूरी कर सकें।

DLI योजना के अंतर्गत इंटीग्रेटेड सर्किट (IC), चिपसेट, सिस्टम-ऑन-चिप (SoC), सिस्टम और IP कोर जैसे सेमीकंडक्टर डिज़ाइनों को व्यापक समर्थन दिया जाता है। इसका उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों में स्वदेशी सेमीकंडक्टर कंटेंट और बौद्धिक संपदा को बढ़ाना, आयात पर निर्भरता कम करना और घरेलू मूल्य वर्धन को सुदृढ़ करना है।

इस योजना के तहत पात्रता को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। DPIIT द्वारा मान्यता प्राप्त स्टार्टअप, MSME मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार MSME और भारतीय नागरिकों के स्वामित्व वाली घरेलू कंपनियां इस योजना का लाभ उठा सकती हैं। स्टार्टअप और MSME डिज़ाइन और उपयोग दोनों के लिए प्रोत्साहन के पात्र हैं, जबकि अन्य घरेलू कंपनियां डिज़ाइन उपयोग के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकती हैं।

वित्तीय प्रोत्साहन के स्तर पर, DLI योजना के तहत उत्पाद डिज़ाइन आधारित प्रोत्साहन में योग्य खर्च का 50 प्रतिशत तक, अधिकतम 15 करोड़ रुपये प्रति आवेदन की सीमा के साथ, दिया जाता है। वहीं उपयोग आधारित प्रोत्साहन के तहत शुद्ध बिक्री कारोबार का 4 से 6 प्रतिशत तक प्रोत्साहन पांच वर्षों के लिए उपलब्ध है, जिसकी अधिकतम सीमा 30 करोड़ रुपये प्रति आवेदन तय की गई है।

इसके साथ ही, डिज़ाइन संबंधी अवसंरचना सहायता DLI योजना का एक मजबूत स्तंभ है। C-DAC द्वारा स्थापित ‘चिपइन सेंटर’ के माध्यम से राष्ट्रीय EDA टूल ग्रिड, IP कोर रिपॉजिटरी, MPW प्रोटोटाइपिंग सहायता और सिलिकॉन पोस्ट-टेपआउट सत्यापन सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे स्टार्टअप और MSME के लिए उच्च लागत वाले डिज़ाइन टूल्स तक पहुंच आसान हो गई है।

दिसंबर 2021 में शुभारंभ के बाद से DLI योजना ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। अब तक 24 DLI-समर्थित चिप डिज़ाइन परियोजनाएं वीडियो सर्विलांस, ड्रोन डिटेक्शन, एनर्जी मीटरिंग, माइक्रोप्रोसेसर, सैटेलाइट कम्युनिकेशन और IoT SoC जैसे रणनीतिक क्षेत्रों को लक्षित कर रही हैं।

इन परियोजनाओं के परिणामस्वरूप 16 सफल टेप-आउट, 6 ASIC चिप निर्माण, 10 पेटेंट और 140 से अधिक पुन: उपयोग योग्य IP कोर विकसित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, 1,000 से अधिक इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया गया है और निजी निवेश का तीन गुना से अधिक लाभ उठाया गया है, जो इस योजना की प्रभावशीलता को दर्शाता है।

चिपइन सेंटर और साझा EDA ग्रिड ने देशभर के लगभग 400 संगठनों के एक लाख से अधिक इंजीनियरों और छात्रों को उन्नत डिज़ाइन टूल्स तक पहुंच दी है। 2 जनवरी 2026 तक, 95 स्टार्टअप द्वारा 54 लाख से अधिक EDA टूल उपयोग घंटे दर्ज किए गए, जो भारत के चिप डिज़ाइन इकोसिस्टम की बढ़ती परिपक्वता को दर्शाता है।

DLI योजना के तहत कई उल्लेखनीय सफलता की कहानियां सामने आई हैं। वर्वेसेमी माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स मोटर कंट्रोल चिप्स के क्षेत्र में वैश्विक ग्राहकों के साथ काम कर रही है, जबकि इनकोर सेमीकंडक्टर्स स्वदेशी RISC-V माइक्रोप्रोसेसर IP विकसित कर आयात निर्भरता कम कर रही है।

नेत्रासेमी ने 12nm प्रोसेस नोड पर भारत का पहला स्वदेशी AI SoC टेप-आउट कर इतिहास रचा है, वहीं अहीसा डिजिटल इनोवेशन्स का ‘विहान’ ब्रॉडबैंड SoC भारत के डिजिटल कनेक्टिविटी भविष्य को नई दिशा दे रहा है। आज्ञाविजन जैसे स्टार्टअप रडार-ऑन-चिप तकनीक के जरिए सुरक्षा और 6G अनुप्रयोगों को सशक्त बना रहे हैं।

संस्थागत स्तर पर MeitY, सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम, C-DAC, चिप्स टू स्टार्टअप (C2S) और माइक्रोप्रोसेसर विकास कार्यक्रम जैसे प्रयास एक समन्वित ढांचा तैयार कर रहे हैं। IIT मद्रास और IIT बॉम्बे द्वारा विकसित ‘शक्ति’, ‘वेगा’ और ‘अजीत’ माइक्रोप्रोसेसर भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता के मजबूत उदाहरण हैं।

कुल मिलाकर, DLI योजना भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला के सबसे रणनीतिक हिस्से—चिप डिज़ाइन—में स्थापित कर रही है। यह न केवल आयात निर्भरता कम कर रही है, बल्कि दीर्घकालिक तकनीकी नेतृत्व, आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मजबूत आधार प्रदान कर रही है।