ICAR ‘खेत बचाओ अभियान’: किसानों को जागरूक करने में बड़ी उपलब्धि

Fri 22-May-2026,11:29 PM IST +05:30

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ICAR ‘खेत बचाओ अभियान’: किसानों को जागरूक करने में बड़ी उपलब्धि Haryana News
  • ICAR खेत बचाओ अभियान की बड़ी उपलब्धि. 

  • किसानों को मृदा स्वास्थ्य पर प्रशिक्षण. 

  • टिकाऊ कृषि और उर्वरक संतुलन पर जोर. 

Haryana / Rohtak :

Rohtak / भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के तहत चलाए जा रहे ‘खेत बचाओ अभियान’ के माध्यम से देशभर में मृदा स्वास्थ्य, संतुलित उर्वरक उपयोग और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। यह अभियान किसानों को वैज्ञानिक तरीके से खेती करने और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए जागरूक करने पर केंद्रित है।

इस पहल के तहत अब तक 12,979 जागरूकता शिविर और सेमिनार आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें लगभग 7.17 लाख किसानों ने भाग लिया। इसके अलावा 3,145 प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से 1,11,509 प्रतिभागियों को आधुनिक कृषि तकनीकों और पोषक तत्व प्रबंधन की जानकारी दी गई है। साथ ही 7,928 क्षेत्रीय प्रदर्शन आयोजित किए गए, जिनमें जैव उर्वरक, हरी खाद और जैविक खेती के व्यावहारिक उपयोग को समझाया गया।

अभियान को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है। 4,916 जनप्रतिनिधि सम्मेलनों के माध्यम से किसानों और नीति निर्माताओं के बीच संवाद को बढ़ावा मिला है। वहीं 9,609 उर्वरक डीलर संवाद कार्यक्रमों ने संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इसके साथ ही किसान उत्पादक संगठनों (FPO), स्वयं सहायता समूहों (SHG) और किसान समूहों (FIG) के माध्यम से भी व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की गई है। इस अभियान के तहत 8,383 किसान सदस्यों को जोड़ा गया है, जिससे ग्रामीण स्तर पर कृषि सुधारों को मजबूती मिली है।

प्रचार-प्रसार के लिए 53,616 स्थानों पर बैनर, पोस्टर और होर्डिंग्स लगाए गए हैं। साथ ही 944 रेडियो कार्यक्रम और 200 टीवी/डिजिटल प्रसारणों के माध्यम से संदेश को और व्यापक रूप से फैलाया गया है। डिजिटल माध्यमों और सोशल मीडिया के जरिए यह अभियान अब तक 2.712 करोड़ लोगों तक पहुंच चुका है।

‘खेत बचाओ अभियान’ का मुख्य उद्देश्य मिट्टी परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन को बढ़ावा देना और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता को कम करना है। इससे न केवल मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है बल्कि दीर्घकालिक कृषि स्थिरता और किसानों की आय में भी सुधार होता है।