कानूनी मापन नियम 2013 में संशोधन: पेट्रोल-डीजल, CNG, LPG और हाइड्रोजन डिस्पेंसर होंगे शामिल
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GATC Rules 2026
GATC ढांचे में 5 नई ईंधन डिस्पेंसर श्रेणियां शामिल.
पेट्रोल, डीजल, CNG, LPG, LNG और हाइड्रोजन कवर.
ईंधन मापन प्रणाली में पारदर्शिता और सटीकता बढ़ेगी.
Delhi / उपभोक्ता मामले विभाग, उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने देश के कानूनी मापन ढांचे को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसके तहत कानूनी मापन (सरकारी अनुमोदित परीक्षण केंद्र) नियम, 2013 में संशोधन किया गया है, जिससे देश में वजन और माप के सत्यापन सिस्टम को और अधिक आधुनिक, पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सके।
इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य सरकारी अनुमोदित परीक्षण केंद्रों (GATC) के दायरे को बढ़ाना है। अब इसमें ईंधन वितरण से जुड़े कई नए उपकरण शामिल किए गए हैं, जिससे देशभर में सत्यापन सेवाओं की पहुंच और क्षमता दोनों में सुधार होगा। इस कदम से स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने और लेन-देन में पारदर्शिता लाने में भी मदद मिलेगी।
संशोधित नियमों के अनुसार अब पांच नई ईंधन वितरण प्रणालियों को GATC ढांचे में शामिल किया गया है। इनमें पेट्रोल/डीजल डिस्पेंसर, सीएनजी डिस्पेंसर, एलपीजी डिस्पेंसर, एलएनजी डिस्पेंसर और हाइड्रोजन डिस्पेंसर शामिल हैं। इससे कुल 23 श्रेणियों का सत्यापन अब सरकारी परीक्षण केंद्रों द्वारा किया जा सकेगा।
सरकार का मानना है कि इस बदलाव से देश में ईंधन वितरण प्रणाली अधिक सटीक और भरोसेमंद बनेगी। खासकर बढ़ते स्वच्छ ईंधन उपयोग को देखते हुए यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सीएनजी, एलएनजी और हाइड्रोजन जैसे ईंधनों की बढ़ती मांग को देखते हुए उनकी माप और वितरण की सटीकता सुनिश्चित करना जरूरी था।
इसके साथ ही राज्य सरकारों को भी अतिरिक्त अधिकार दिए गए हैं ताकि वे स्थानीय जरूरतों के अनुसार सत्यापन श्रेणियों का विस्तार कर सकें। प्रशासनिक स्तर पर भी सुधार करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों को अधिक शक्तियां दी गई हैं, जिससे मामलों का तेजी से निपटारा हो सके।
संशोधित नियमों के तहत सत्यापन शुल्क भी निर्धारित कर दिया गया है। पेट्रोल और डीजल डिस्पेंसर के लिए 5000 रुपये प्रति नोजल और अन्य गैस आधारित डिस्पेंसरों के लिए 10,000 रुपये प्रति नोजल शुल्क तय किया गया है।
कुल मिलाकर यह संशोधन भारत के माप और सत्यापन ढांचे को मजबूत करने, सेवाओं को तेज बनाने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने की दिशा में एक बड़ा और सकारात्मक कदम माना जा रहा है।