गाजियाबाद जासूसी कांड: सीमा पार से चल रहा था नेटवर्क, कई आरोपी गिरफ्तार
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Ghaziabad Spy Case
गाजियाबाद में जासूसी नेटवर्क का बड़ा भंडाफोड़.
सीमा पार से संचालित हो रहा था पूरा गिरोह.
युवाओं को पैसे का लालच देकर शामिल किया गया.
Ghaziabad / गाजियाबाद में देश विरोधी गतिविधियों से जुड़े एक बड़े जासूसी नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। यह मामला तब सामने आया जब 14 मार्च को कौशाम्बी थाना पुलिस को सूचना मिली कि भोवापुर इलाके में रहने वाले कुछ लोग संदिग्ध गतिविधियों में शामिल हैं। शुरुआती जांच में पता चला कि ये लोग रेलवे स्टेशनों, सुरक्षा बलों के ठिकानों और अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों के वीडियो और तस्वीरें बनाकर विदेश में बैठे लोगों को भेज रहे थे।
सूचना मिलते ही पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज किया और जांच शुरू कर दी। शुरुआती कार्रवाई में 5 पुरुषों और 1 महिला को गिरफ्तार किया गया। जब उनके मोबाइल फोन की जांच की गई, तो उसमें कई संवेदनशील जगहों के फोटो, वीडियो और लोकेशन डेटा मिले, जिससे यह साफ हो गया कि मामला बेहद गंभीर है और इसका संबंध एक संगठित नेटवर्क से है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर पुलिस आयुक्त के निर्देश पर एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। इस टीम में डीसीपी ट्रांसहिंडन की निगरानी, एडीसीपी क्राइम के नेतृत्व, एसीपी इंदिरापुरम, इंटेलिजेंस यूनिट, साइबर क्राइम टीम और स्वाट टीम को शामिल किया गया। एसआईटी ने 17 मार्च से आरोपियों को रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ शुरू की।
पूछताछ के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। 20 मार्च को एसआईटी ने 9 और लोगों को हिरासत में लिया, जिनमें 5 नाबालिग भी शामिल थे। इसके बाद 22 मार्च को एक और आरोपी नौशाद अली को गिरफ्तार किया गया। उसकी निशानदेही पर एक महिला और एक नाबालिग को भी पकड़ा गया। नौशाद अली बिहार का रहने वाला है और केवल आठवीं तक पढ़ा है, जबकि महिला मीरा उत्तर प्रदेश के मथुरा की रहने वाली है और पांचवीं तक शिक्षित है।
जांच में यह भी सामने आया कि यह पूरा नेटवर्क सीमा पार से संचालित किया जा रहा था। इस गिरोह के मुख्य सरगना सुहैल मलिक, नौशाद अली और समीर उर्फ शूटर बताए जा रहे हैं। सुहैल मलिक को पहले ही 14 मार्च को गिरफ्तार किया जा चुका है। नौशाद अली ने खुलासा किया कि वह सोशल मीडिया के माध्यम से इस नेटवर्क से जुड़ा था और उसे विशेष ऐप के जरिए फोटो और वीडियो भेजने की ट्रेनिंग दी गई थी।
गिरोह के सदस्य संवेदनशील स्थानों की रेकी करते थे और वहां की जानकारी विदेशी नंबरों पर भेजते थे। इसके बदले उन्हें पैसे का लालच दिया जाता था और इसी लालच में कई युवाओं को इस नेटवर्क से जोड़ा गया। महिला आरोपी मीरा इस गिरोह में हथियारों की तस्करी का काम करती थी और वह पहले भी दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा गिरफ्तार की जा चुकी है।
इस पूरे मामले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि देश विरोधी ताकतें अब सोशल मीडिया और तकनीक के जरिए युवाओं को फंसाने की कोशिश कर रही हैं। सुरक्षा एजेंसियां अब इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी हैं और मामले की जांच लगातार जारी है।