निवाड़ी स्कूल में मिड-डे मील घोटाला? 160 बच्चों को नाममात्र भोजन
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निवाड़ी जिले के बिंदपुरा प्राथमिक विद्यालय में मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता पर सवाल, 160 बच्चों के लिए बेहद कम राशन का खुलासा।
नगर परिषद अध्यक्ष और सीएमओ के औचक निरीक्षण का वीडियो वायरल, मौके पर शिकायत के बावजूद कार्रवाई न होने पर नाराजगी।
Madhya Pradesh/ मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले में सरकारी स्कूलों के मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। पृथ्वीपुर कस्बे के बिंदपुरा प्राथमिक विद्यालय से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें बच्चों को दिए जा रहे भोजन की बदहाल स्थिति उजागर हुई है। वीडियो के सामने आने के बाद शिक्षा और नगर परिषद व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं, वहीं अब तक ठोस कार्रवाई न होना भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
160 बच्चों के लिए नाममात्र राशन
वायरल वीडियो नगर परिषद पृथ्वीपुर की अध्यक्ष नीलू खटीक और नगर परिषद के मुख्य नगर अधिकारी (सीएमओ) महमूद हसन के औचक निरीक्षण के दौरान का बताया जा रहा है। निरीक्षण में सामने आया कि करीब 160 बच्चों के लिए सिर्फ 2 किलो आलू की सब्जी और महज आधा किलो दाल बनाई जा रही थी। इतने सीमित राशन में बच्चों को पौष्टिक और पर्याप्त भोजन मिलना लगभग असंभव नजर आया।
सीएमओ ने मौके पर की जांच
वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि सीएमओ खुद थाली में भोजन लेकर उसकी गुणवत्ता की जांच करते दिखाई दे रहे हैं। इस दौरान मौके पर मौजूद ग्रामीण और अभिभावक घटिया भोजन को लेकर खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर करते नजर आए। निरीक्षण के दौरान ही शिकायत सामने आने के बावजूद किसी भी जिम्मेदार पर तत्काल कार्रवाई न होना प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।
कार्रवाई न होने पर उठे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शिकायत मौके पर, जिम्मेदार अधिकारियों की मौजूदगी में सामने आई और उसका वीडियो सार्वजनिक रूप से वायरल हो चुका है, तो फिर अब तक दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई। बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य से जुड़ा यह मामला गंभीर होने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर सिर्फ निर्देश देकर मामला शांत करने की कोशिश की जा रही है।
सीएमओ ने क्या कहा
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए नगर परिषद सीएमओ महमूद हसन ने बताया कि वे नगर परिषद अध्यक्ष के साथ सफाई व्यवस्था के निरीक्षण के लिए क्षेत्र में गए थे। उसी दौरान ग्रामीणों ने स्कूल में मध्यान्ह भोजन की शिकायत की, जिसके बाद मौके पर भोजन की जांच की गई।
सीएमओ का कहना है कि उस दिन बच्चों की उपस्थिति कम थी और रसोइयों को निर्धारित मेन्यू के अनुसार भोजन बनाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही स्कूल में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। हालांकि, इस बयान के बाद भी यह सवाल बना हुआ है कि क्या सिर्फ निर्देश देना पर्याप्त है, या फिर बच्चों के भविष्य से जुड़े इस मामले में कड़ी कार्रवाई जरूरी नहीं है।