इंदौर में दहेज विवाद और नारायण साईं पेशी, दो मामलों से शहर में हलचल
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इंदौर में पुजारी परिवार की बहू ने दहेज प्रताड़ना और मारपीट के आरोप लगाए, पुलिस ने शिकायत दर्ज कर मामले की जांच शुरू की।
दोनों मामलों ने दहेज प्रथा, पारिवारिक विवाद और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर शहर में सामाजिक और कानूनी बहस को तेज किया।
INDORE/ मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में सोमवार को दो अलग-अलग घटनाओं ने शहरभर में चर्चा का माहौल बना दिया। एक ओर खजराना गणेश मंदिर से जुड़े पुजारी परिवार की बहू ने दहेज प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए, वहीं दूसरी ओर चर्चित मामले में नारायण साईं की फैमिली कोर्ट में पेशी हुई। दोनों मामलों ने सामाजिक और कानूनी मुद्दों को लेकर बहस को तेज कर दिया है।
पहले मामले में खजराना गणेश मंदिर से जुड़े पुजारी परिवार की बहू पुलिस आयुक्त कार्यालय पहुंची और अपने पति पुनीत भट्ट समेत ससुराल पक्ष के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। महिला ने आरोप लगाया कि उसे लगातार दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया, शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान किया गया और अंततः घर से निकाल दिया गया। शिकायत के अनुसार ससुराल पक्ष द्वारा एक करोड़ रुपये और फॉर्च्यूनर कार की मांग की जा रही थी।
पुलिस आयुक्त कार्यालय में महिला का बयान दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, जानकारी यह भी सामने आई है कि महिला के खिलाफ भी मारपीट से जुड़ा एक मामला दर्ज है, जिसकी जांच समानांतर रूप से जारी है।
दूसरे मामले में आसाराम के बेटे नारायण साईं को कड़ी सुरक्षा के बीच सूरत से इंदौर लाया गया। उन्हें फैमिली कोर्ट में पेश किया गया, जहां उनकी पत्नी जानकी द्वारा दायर भरण-पोषण और तलाक याचिका पर सुनवाई हुई। इस मामले में 50 हजार रुपये मासिक भरण-पोषण का मुद्दा प्रमुख रूप से उठाया गया।
कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। बड़ी संख्या में समर्थकों की मौजूदगी को देखते हुए पुलिस ने विशेष सतर्कता बरती। नारायण साईं को सुरक्षा घेरे में कोर्ट तक लाया गया और सुनवाई के बाद वापस ले जाने की तैयारी की गई।
इन दोनों घटनाओं ने शहर में पारिवारिक विवाद, दहेज प्रथा और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। एक ओर जहां दहेज प्रताड़ना का मामला सामाजिक कुरीतियों की गंभीरता को उजागर करता है, वहीं दूसरी ओर हाई-प्रोफाइल केस की सुनवाई न्यायिक प्रणाली की संवेदनशीलता को दर्शाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित और निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है, ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके और समाज में सही संदेश जाए। फिलहाल दोनों ही मामलों में जांच और सुनवाई जारी है, जिन पर सभी की नजरें बनी हुई हैं।