INS सागरध्वनि रवाना: सागर मैत्री मिशन से हिंद महासागर में वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ावा

Sun 18-Jan-2026,10:56 PM IST +05:30

ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |

Follow Us

INS सागरध्वनि रवाना: सागर मैत्री मिशन से हिंद महासागर में वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ावा INS Sagardhwani
  • आईएनएस सागरध्वनि सागर मैत्री (SM-5) मिशन पर रवाना.

  • हिंद महासागर देशों के साथ समुद्री वैज्ञानिक सहयोग.

  • अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस को मिलेगी मजबूती.

Kerala / Kollam :

Kerala / रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की नेवल फिजिकल एंड ओशनोग्राफिक लेबोरेटरी (एनपीओएल) का समुद्र विज्ञान अनुसंधान पोत आईएनएस सागरध्वनि 17 जनवरी 2026 को दक्षिणी नौसेना कमान, कोच्चि से सागर मैत्री (SM-5) पहल के पांचवें संस्करण के लिए रवाना हुआ। यह मिशन भारत की समुद्री वैज्ञानिक कूटनीति और हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।

इस अनुसंधान पोत को हरी झंडी माननीय संसद सदस्य और रक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष श्री राधा मोहन सिंह ने दिखाई। इस अवसर पर रक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति के सदस्य, डीआरडीओ प्रमुख डॉ. समीर वी. कामत, दक्षिणी नौसेना कमान के चीफ ऑफ स्टाफ रियर एडमिरल उपल कुंडू, एनपीओएल के निदेशक डॉ. दुव्वुरी शेषागिरी सहित भारतीय नौसेना और डीआरडीओ के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। यह उपस्थिति इस मिशन के रणनीतिक और वैज्ञानिक महत्व को दर्शाती है।

सागर मैत्री भारतीय नौसेना और डीआरडीओ की एक प्रमुख संयुक्त पहल है, जो भारत सरकार के MAHASAGAR (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) विजन के अनुरूप है। इसका उद्देश्य हिंद महासागर रिम (IOR) देशों के बीच सामाजिक-आर्थिक सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ समुद्री अनुसंधान में वैज्ञानिक संवाद और साझेदारी को मजबूत करना है। इस पहल के जरिए भारत क्षेत्रीय देशों के साथ भरोसे, ज्ञान और तकनीक का साझा मंच तैयार कर रहा है।

एनपीओएल, कोच्चि इस कार्यक्रम के तहत IOR देशों के साथ समुद्र विज्ञान मिशनों का संचालन कर रहा है। इसी क्रम में डीआरडीओ ने MAITRI (Marine and Allied Interdisciplinary Training and Research Initiative) नामक वैज्ञानिक घटक की शुरुआत की है, जिसका लक्ष्य समुद्री अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग स्थापित करना है। इससे भागीदार देशों के वैज्ञानिकों को प्रशिक्षण, संयुक्त अनुसंधान और पेशेवर आदान-प्रदान के अवसर मिलेंगे।

सागर मैत्री (SM-5) मिशन के तहत आईएनएस सागरध्वनि उन ऐतिहासिक समुद्री मार्गों पर भी चलेगी, जिन पर 1962 से 1965 के बीच आईएनएस कृष्णा ने अंतरराष्ट्रीय हिंद महासागर अभियान में भाग लिया था। यह मिशन ओमान, मालदीव, श्रीलंका, थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया और म्यांमार सहित आठ IOR देशों के साथ निरंतर वैज्ञानिक सहयोग को आगे बढ़ाने का प्रयास है। इस बार मिशन की शुरुआत मालदीव के साथ सहयोगी समुद्र विज्ञान अध्ययनों से हो रही है, जिससे संयुक्त शोध और डेटा साझा करने की संभावनाएं और मजबूत होंगी।

यह पहल भारतीय नौसेना के लिए अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस (UDA) को सशक्त करने की दिशा में भी बेहद अहम है। मिशन के दौरान आईएनएस सागरध्वनि द्वारा तय किए गए ऑब्जर्वेशनल ट्रैक पर महत्वपूर्ण समुद्र विज्ञान और ध्वनिक डेटा एकत्र किया जाएगा, जो रणनीतिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टि से उपयोगी होगा।

गौरतलब है कि आईएनएस सागरध्वनि एक विशेष समुद्री ध्वनिक अनुसंधान पोत है, जिसे एनपीओएल ने डिज़ाइन किया और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) ने निर्मित किया। जुलाई 1994 में कमीशन किया गया यह पोत पिछले तीन दशकों से समुद्री अवलोकन और अनुसंधान में अहम भूमिका निभा रहा है। सागर मैत्री (SM-5) के जरिए यह पोत एक बार फिर भारत की समुद्री वैज्ञानिक क्षमता और क्षेत्रीय सहयोग की मजबूत पहचान बनने जा रहा है।