निगरानी ब्यूरो का बड़ा ऐलान: 2026 में भ्रष्ट लोकसेवकों पर शिकंजा और तेज, स्पीडी ट्रायल पर जोर

Thu 01-Jan-2026,09:58 PM IST +05:30

ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |

Follow Us

निगरानी ब्यूरो का बड़ा ऐलान: 2026 में भ्रष्ट लोकसेवकों पर शिकंजा और तेज, स्पीडी ट्रायल पर जोर Bihar-Crruption-Action
  • 2026 में स्पीडी ट्रायल कोषांग से सजा की प्रक्रिया तेज होगी.

  • 2025 में 107 लोकसेवक घूस लेते पकड़े गए.

  • डीए मामलों में 12 करोड़ से अधिक की अवैध संपत्ति जब्त.

Bihar / Patna :

Delhi / नए वर्ष 2026 में निगरानी ब्यूरो भ्रष्ट लोकसेवकों के खिलाफ कार्रवाई को और तेज करने पर विशेष ध्यान देगा। डीजी जितेंद्र सिंह गंगवार ने बताया कि भ्रष्टाचार के आरोप में पकड़े गए लोकसेवकों को समय पर सजा दिलाने के लिए स्पीडी ट्रायल कोषांग का गठन किया जाएगा। 2025 में निगरानी ब्यूरो की उपलब्धियां बेहद शानदार रही हैं। पिछले 25 वर्षों में औसतन 72-73 एफआईआर दर्ज होती थीं, लेकिन 2025 में यह संख्या बढ़कर 122 हो गई। इसमें सबसे अधिक 101 एफआईआर घूस लेने वाले लोकसेवकों से संबंधित रही, जिसमें 107 भ्रष्ट अधिकारी पकड़े गए, जिनमें 7 महिलाएं और 6 बिचौलिए शामिल थे। इन मामलों में कुल 37 लाख 80 हजार 300 रुपये की घूस जब्त की गई।

डीए यानी आय से अधिक संपत्ति के मामलों में भी कार्रवाई दोगुनी हुई। 2024 में केवल 2 एफआईआर दर्ज हुई थीं, जबकि 2025 में 15 मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में कुल 12 करोड़ 77 लाख रुपये की अवैध संपत्ति पकड़ी गई, जिसमें सबसे बड़ा केस भवन निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता से जुड़ा है, जिसमें 2 करोड़ 74 लाख रुपये की संपत्ति शामिल है। इसके अलावा राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के 4, ग्रामीण कार्य विभाग के 3 और पुलिस महकमा के 2 पदाधिकारियों पर कार्रवाई हुई।

पद के गलत दुरुपयोग (एओपीए) से जुड़े मामले भी बढ़े हैं। पिछले वर्ष 5 मामले दर्ज हुए थे, जबकि इस वर्ष 6 मामले दर्ज किए गए। इसकी मुख्य वजह विभागीय अनुमति प्रक्रिया में बदलाव है। निगरानी ब्यूरो में जांच के मामलों के निपटारे की दर भी तेजी से बढ़ रही है। 2020 में 17 नए मामले दर्ज हुए और 23 का निपटारा हुआ, 2021 में 13 नए मामले दर्ज हुए और 62 का निपटारा हुआ। वहीं 2025 में 80 नए मामले दर्ज हुए और 121 का निपटारा किया गया। इससे पहले औसतन भ्रष्ट लोकसेवकों को सजा दिलाने में 12-13 वर्ष लगते थे, लेकिन अब इस समय को कम करने के लिए स्पीडी ट्रायल की व्यवस्था की जा रही है, जिसकी कमान डीआईजी-2 मृत्युंजय कुमार संभालेंगे।

नियोजित शिक्षकों के मामलों की जांच भी लगातार जारी है। 2016 से इस मामले की जांच हो रही है और अब तक 6,56,595 सर्टिफिकेट निगरानी ब्यूरो को जांच के लिए दिए जा चुके हैं। इस जांच में अब तक 1,711 एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिसमें 2,916 शिक्षकों को अभियुक्त बनाया गया है। 2025 में इस मामले में 130 नई एफआईआर दर्ज की गई। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि निगरानी ब्यूरो ने भ्रष्टाचार और अनुचित गतिविधियों पर नियंत्रण और न्याय सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है और नए साल में इसकी गति और प्रभावशीलता और बढ़ाई जाएगी।