भारत की अपतटीय सुरक्षा बैठक 2026: OSCC की 138वीं बैठक में ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री ढांचे पर जोर
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India Coastal Security
अपतटीय ऊर्जा और समुद्री संरचना सुरक्षा पर समीक्षा.
ड्रोन और आधुनिक खतरों से निपटने की रणनीति पर चर्चा.
सभी सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय मजबूत करने पर जोर.
Delhi / भारत की समुद्री और अपतटीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक अहम कदम के तहत 21 मई 2026 को अहमदाबाद में 138वीं अपतटीय सुरक्षा समन्वय समिति (OSCC) की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमणि ने की। इसका मुख्य उद्देश्य देश के अपतटीय प्रतिष्ठानों, ऊर्जा संरचनाओं और समुद्री संसाधनों की सुरक्षा व्यवस्था की गहन समीक्षा करना और उसे और अधिक प्रभावी बनाना था।
आज के समय में जब वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य तेजी से बदल रहा है, समुद्री क्षेत्र में भी चुनौतियाँ लगातार बढ़ रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए इस बैठक में समुद्री क्षेत्र की जागरूकता (Maritime Domain Awareness) को और मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। इसके साथ ही विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और निगरानी प्रणाली को अधिक आधुनिक बनाने पर भी चर्चा हुई।
बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया के लिए संयुक्त तंत्र को और सुदृढ़ किया जाना जरूरी है। आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप, खासकर ड्रोन और मानवरहित तकनीकों से उत्पन्न खतरों पर भी गंभीर चर्चा की गई। यह माना गया कि भविष्य में ऐसे खतरों से निपटने के लिए तकनीकी क्षमता और तैयारी दोनों को बढ़ाना आवश्यक है।
अंडमान और निकोबार क्षेत्र में बढ़ती अपतटीय अन्वेषण गतिविधियों को भी बैठक में विशेष रूप से शामिल किया गया। यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए यहां सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने पर भी विचार किया गया।
इस उच्च स्तरीय बैठक में भारतीय तटरक्षक बल, भारतीय नौसेना, भारतीय वायु सेना, गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, महानिदेशक हाइड्रोग्राफर, महानिदेशक जहाजरानी, खुफिया ब्यूरो, तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग तथा विभिन्न राज्य पुलिस बलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभी एजेंसियों ने मिलकर यह सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई कि देश की समुद्री सीमाएँ और अपतटीय संपत्तियाँ पूरी तरह सुरक्षित रहें।
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही रहा कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री ढांचे की सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। इसलिए इन दोनों क्षेत्रों में समन्वय, सतर्कता और तकनीकी उन्नयन को लगातार मजबूत करना समय की आवश्यकता है। यह बैठक देश की समुद्री सुरक्षा नीति को और अधिक प्रभावी और भविष्य-उन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।