मौसम विभाग और आईआईटीएम के पूर्वानुमान के अनुसार आने वाले दिनों में भी हवा की गुणवत्ता में कोई खास सुधार की संभावना नहीं है। ऐसे में प्रदूषण का स्तर ‘खराब’ श्रेणी में ही बने रहने की आशंका जताई जा रही है। इसी वजह से प्रशासन ने पहले ही सतर्कता बढ़ा दी है।
GRAP यानी ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान एक ऐसी प्रणाली है, जिसे दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के स्तर के आधार पर चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाता है। जैसे-जैसे AQI बढ़ता है, वैसे-वैसे इसके सख्त नियम लागू होते जाते हैं। फिलहाल GRAP-1 लागू होने के बाद कई जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं ताकि हालात और न बिगड़ें।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार AQI को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है—0 से 50 तक अच्छा, 51 से 100 संतोषजनक, 101 से 200 मध्यम, 201 से 300 खराब, 301 से 400 बहुत खराब और 401 से 500 गंभीर। 208 AQI होने के कारण दिल्ली की हवा अब ‘खराब’ श्रेणी में आ चुकी है।
GRAP-1 के तहत कई सख्त नियम लागू किए गए हैं। निर्माण स्थलों पर धूल उड़ने से रोकने के लिए विशेष इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं। सड़कों पर नियमित रूप से पानी का छिड़काव किया जाएगा ताकि धूल कम हो सके। इसके साथ ही खुले में कचरा जलाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर निगरानी बढ़ा दी गई है और औद्योगिक क्षेत्रों में भी सख्ती की जा रही है।
दिल्ली में इस समय गर्मी भी काफी ज्यादा है, जिससे हालात और कठिन हो गए हैं। तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच बढ़ता प्रदूषण लोगों की सेहत पर असर डाल रहा है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा या सांस की बीमारी से पीड़ित लोगों को अधिक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे मौसम में बाहर निकलते समय मास्क का उपयोग करना जरूरी है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आने वाले दिनों में हवा की गति और मौसम में बदलाव नहीं हुआ, तो स्थिति और खराब हो सकती है। ऐसे में GRAP के अगले चरण भी लागू किए जा सकते हैं।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करना और लोगों को राहत देना है। सरकार और संबंधित एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि समय रहते जरूरी कदम उठाए जा सकें।