भारत-दक्षिण कोरिया रक्षा वार्ता: राजनाथ सिंह ने सहयोग और तकनीक साझेदारी को दी नई दिशा
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India South Korea Defence
भारत-दक्षिण कोरिया रक्षा वार्ता सियोल में.
साइबर सुरक्षा और तकनीक पर सहयोग.
रक्षा उत्पादन और रणनीतिक साझेदारी मजबूत.
Delhi / रक्षा क्षेत्र में भारत और दक्षिण कोरिया के बीच संबंधों को नई मजबूती देने के उद्देश्य से 20 मई 2026 को सियोल में एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय रक्षा वार्ता आयोजित की गई। इस बैठक में भारत के रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह और दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री श्री आन ग्यू-बैक ने भाग लिया। दोनों नेताओं ने रक्षा सहयोग के सभी प्रमुख क्षेत्रों की समीक्षा की और भविष्य में इसे और गहरा करने पर सहमति जताई।
बैठक में उद्योग, उत्पादन, समुद्री सुरक्षा, साइबर रक्षा, उभरती तकनीक, सैन्य प्रशिक्षण और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। दोनों देशों ने माना कि भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ और दक्षिण कोरिया की क्षेत्रीय रणनीति एक-दूसरे के पूरक हैं, जिससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सहयोग को मजबूती मिलती है।
इस दौरान कई महत्वपूर्ण समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए गए, जिनमें साइबर रक्षा सहयोग, संयुक्त प्रशिक्षण और संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन से जुड़ी साझेदारी शामिल है। इसके अलावा, दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच सह-विकास और सह-उत्पादन को बढ़ावा देने पर भी सहमति बनी।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत का रक्षा क्षेत्र अब तेजी से आधुनिक तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिस्टम, सेमीकंडक्टर, ड्रोन और अंतरिक्ष तकनीक की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि भारत का स्टार्टअप और MSME इकोसिस्टम इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत और कोरिया की साझेदारी केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रणनीतिक विश्वास और तकनीकी सहयोग का एक मजबूत उदाहरण बन रही है। दोनों देश मिलकर भविष्य की उन्नत रक्षा प्रणालियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
इस अवसर पर भारतीय रक्षा मंत्री ने दक्षिण कोरिया में भारतीय प्रवासियों से भी मुलाकात की और भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत अब एक मजबूत और निर्णायक राष्ट्र के रूप में उभर रहा है, जो न केवल अपनी सुरक्षा बल्कि वैश्विक स्थिरता में भी योगदान दे रहा है।
यह पूरी यात्रा भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।