आईएनएस सुनयना की ऐतिहासिक IOS सागर यात्रा का समापन: भारतीय नौसेना की बड़ी उपलब्धि
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IOS Sagar News
IOS सागर यात्रा का कोच्चि में समापन.
16 देशों के साथ समुद्री सहयोग मजबूत.
भारत की समुद्री रणनीतिक भूमिका में वृद्धि.
Delhi / भारतीय नौसेना ने 20 मई 2026 को कोच्चि में आईएनएस सुनयना के स्वागत के साथ ऐतिहासिक आईओएस सागर यात्रा के सफल समापन का भव्य आयोजन किया। यह यात्रा हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सहयोग, सुरक्षा और साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई। इस बहुराष्ट्रीय अभियान में 16 देशों के 38 कर्मियों ने भाग लिया, जिसने भारत की क्षेत्रीय समुद्री नेतृत्व क्षमता को और मजबूत किया।
यह अभियान भारत की “सागर” (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) और “महासागर” (पारस्परिक और समग्र उन्नति) जैसी रणनीतिक समुद्री नीतियों का व्यावहारिक उदाहरण रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप इस यात्रा का उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सामूहिक विकास को बढ़ावा देना था।
यात्रा के दौरान जहाज ने माले, फुकेत, जकार्ता, सिंगापुर, यांगून, चटोग्राम और कोलंबो जैसे प्रमुख बंदरगाहों पर ठहराव किया। इस दौरान विभिन्न गतिविधियों जैसे संयुक्त अभ्यास, क्रॉस-डेक विजिट, समुद्री सुरक्षा संवाद और पेशेवर प्रशिक्षण आयोजित किए गए। इन गतिविधियों ने भागीदार देशों की नौसेनाओं के बीच भरोसा और तालमेल को मजबूत किया।
कोच्चि लौटने पर आईएनएस सुनयना का स्वागत वाटर कैनन सलामी के साथ किया गया, जिससे पूरे नौसैनिक परिसर में उत्साह का माहौल बन गया। दक्षिणी नौसेना कमान के वरिष्ठ अधिकारियों ने चालक दल की पेशेवर क्षमता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की सराहना की।
इस अवसर पर वाइस एडमिरल समीर सक्सेना ने कहा कि आईओएस सागर जैसी पहलें न केवल परिचालन क्षमता को बढ़ाती हैं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में सामूहिक शक्ति को भी मजबूत करती हैं। समुद्री डकैती, तस्करी और अवैध गतिविधियों के खिलाफ यह सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है।
यात्रा से पहले दल को कोच्चि में व्यापक प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें समुद्री कौशल, अग्निशमन, संचार, क्षति नियंत्रण और संयुक्त संचालन की तैयारियां शामिल थीं। इससे मिशन की सफलता सुनिश्चित हुई।
यह पूरा अभियान भारत की बढ़ती समुद्री भूमिका और हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी जिम्मेदार नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है। यह न केवल सैन्य सहयोग का प्रतीक है, बल्कि क्षेत्रीय देशों के बीच विश्वास, मित्रता और साझा विकास की दिशा में एक मजबूत कदम भी है।