भारत-जापान का नया Sky Alliance: AMTA 2026 में Kawasaki C-2 बना गेमचेंजर
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भारत और जापान का Kawasaki C-2 सहयोग 40-टन कैटेगरी में एयर-लिफ्ट क्षमता बढ़ाकर एशिया में नई रणनीतिक शक्ति संतुलन का आधार तैयार कर रहा है।
2026 AMTA टेंडर में AN-32 रिप्लेसमेंट को बदलकर भारत ने सीधे हाई-एंड ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की दिशा में बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है।
Kawasaki C-2 की हाई-स्पीड, लांग-रेंज और जापानी एवियॉनिक्स भारत के रक्षा लॉजिस्टिक नेटवर्क को भविष्य के मल्टी-थिएटर ऑपरेशन के लिए मजबूत बना सकती है।
नई दिल्ली / भारत ने 2026 के AMTA (Advanced Medium Transport Aircraft) टेंडर में ऐसा कदम उठाया है जिसने वैश्विक रक्षा बाज़ार का पूरा समीकरण बदल दिया है। लंबे समय से चल रहे AN-32 Replacement Program को नई दिशा देते हुए भारत ने अब सीधे 40-टन क्लास Transport Aircraft कैटेगरी में प्रवेश कर लिया है। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि इस बार रेस में एक अप्रत्याशित दावेदार शामिल हो गया है जापान का Kawasaki C-2 Super Transport Aircraft।
जापान, जो दशकों तक सैन्य उपकरणों का निर्यात नहीं करता था, उसने पहली बार भारत के सामने अपने रक्षा बाज़ार के दरवाज़े खोले हैं। रक्षा विशेषज्ञ इसे सिर्फ एक डील नहीं, बल्कि एशिया की नई रणनीतिक शक्ति India–Japan Strategic Sky Alliance की शुरूआत मान रहे हैं।
Kawasaki C-2 की खासियत यह है कि यह 40 टन तक का पेलोड उठा सकता है, 900 km/h से ज्यादा स्पीड पर उड़ सकता है और हिमालयी फ्रंटियर सहित कठोर रनवे पर भी ऑपरेट करने में सक्षम है। जापान की हाई-एंड एवियॉनिक्स टेक्नोलॉजी के साथ भारतीय एयरबेस की ज़रूरतों का यह संयोजन एशिया के लिए एक गेमचेंजर माना जा रहा है।
भारत की ओर से C-2 को लेकर शुरुआती मूल्यांकन बेहद सकारात्मक है। रक्षा विश्लेषकों का अनुमान है कि C-130J और A400M की तुलना में C-2 भारत को बेहतर पेलोड, लंबी रेंज और उच्च तकनीकी अपग्रेड की संभावनाएँ देगा। यदि यह डील आगे बढ़ती है, तो इसे इंडो-पैसिफिक सहयोग का सबसे बड़ा रक्षा अध्याय माना जाएगा। यह सौदा भविष्य में संयुक्त निर्माण, सप्लाई-चेन कोलैबरेशन और भारत-जापान के लिए रणनीतिक एयर-लिफ्ट क्षमता में भारी उछाल का रास्ता खोल सकता है।