वैज्ञानिक पशुपालन अपनाएं, किसानों की आय बढ़ाएं: शिवराज सिंह चौहान ने कृषि विश्वविद्यालयों से नियमित प्रशिक्षण का किया आह्वान

Wed 05-Aug-2026,11:06 PM IST +05:30

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वैज्ञानिक पशुपालन अपनाएं, किसानों की आय बढ़ाएं: शिवराज सिंह चौहान ने कृषि विश्वविद्यालयों से नियमित प्रशिक्षण का किया आह्वान शिवराज सिंह चौहान ने कृषि विश्वविद्यालयों से नियमित प्रशिक्षण का किया आह्वान
  • शिवराज सिंह चौहान ने वैज्ञानिक पशुपालन और व्यावहारिक प्रशिक्षण पर दिया जोर।

  • कृषि विश्वविद्यालयों से नियमित किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने का आह्वान।

  • आधुनिक डेयरी तकनीकों से दुग्ध उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस।

Delhi / New Delhi :

New Delhi / केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक पशुपालन और व्यावहारिक प्रशिक्षण को सबसे प्रभावी माध्यम बताया है। उन्होंने कहा कि केवल अनाज उत्पादन से किसानों की आय में अपेक्षित वृद्धि संभव नहीं है, इसलिए पशुपालन, डेयरी और अन्य कृषि आधारित गतिविधियों को आधुनिक तकनीकों के साथ अपनाना समय की जरूरत है। वे रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी में किसानों और पशुपालकों के लिए आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन सत्र को वर्चुअल माध्यम से संबोधित कर रहे थे।

कार्यक्रम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक एवं डेयर सचिव डॉ. एम. एल. जाट, विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ए. के. सिंह, आईसीएआर के वैज्ञानिक, विश्वविद्यालय परिवार के सदस्य तथा विभिन्न राज्यों से जुड़े किसान और पशुपालक भी उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री ने विश्वविद्यालय द्वारा किसानों और पशुपालकों को व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि कृषि शिक्षा तभी सार्थक होती है, जब उसे खेतों और पशुपालन के कार्यों में व्यवहारिक रूप से लागू किया जाए। उन्होंने सभी कृषि विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों से अपने-अपने क्षेत्रों में इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने का आह्वान किया।

शिवराज सिंह चौहान ने प्रशिक्षण प्राप्त किसानों से कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल तीन दिन का प्रशिक्षण लेना नहीं, बल्कि सीखी गई वैज्ञानिक तकनीकों को अपने दैनिक कार्यों में अपनाना है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ पशुओं का चयन, संतुलित आहार, रोग प्रबंधन, वैज्ञानिक प्रजनन तकनीक और दुग्ध उत्पादन की आधुनिक विधियां किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना चाहती है। पशुपालन को कृषि का मजबूत आधार बताते हुए उन्होंने कहा कि यदि किसान वैज्ञानिक तरीके से डेयरी और पशुपालन अपनाएं तो उनकी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। उन्होंने दोहराया कि किसानों के जीवन में समृद्धि और खुशहाली लाना ही सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षण प्राप्त किसानों ने भी अपने अनुभव साझा किए और बताया कि प्रशिक्षण से उन्हें पशुपालन के आधुनिक तरीकों की उपयोगी जानकारी मिली है, जिसका लाभ उन्हें भविष्य में मिलेगा।

इस अवसर पर आईसीएआर के महानिदेशक एवं डेयर सचिव डॉ. एम. एल. जाट ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए एकीकृत कृषि प्रणाली (इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम) को बढ़ावा देना आवश्यक है। उन्होंने डेयरी को इस प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि वैज्ञानिक तकनीकों को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाने चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि कृषि विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के माध्यम से किसानों तक आधुनिक कृषि एवं पशुपालन तकनीकों का लाभ तेजी से पहुंचेगा, जिससे देश में दुग्ध उत्पादन और किसानों की आय दोनों में वृद्धि होगी।