लोनी बुद्रुक ग्राम सभा में शिवराज सिंह चौहान का संवाद- जी राम जी एक्ट, 2025, गांव की ज़रूरत, फैसला ग्राम सभा का
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जी राम जी एक्ट 2025 के तहत 125 दिन का रोजगार, समय पर मजदूरी और देरी पर ब्याज का प्रावधान।
ग्राम सभा को गांव के काम तय करने का अधिकार, स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकास कार्य।
महिलाओं को 33% कार्य अनिवार्य, कृषि सीजन में मजदूरों की उपलब्धता के लिए राज्यों को छूट।
अहमदनगर/ 1 जनवरी 2026 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के लोनी बुद्रुक गांव में आयोजित विशेष ग्राम सभा में केन्द्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने विकसित भारत: जी राम जी एक्ट, 2025 के प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर उन्होंने मजदूरों, श्रमिकों और ग्रामीणों से सीधा संवाद किया और बताया कि यह अधिनियम ग्रामीण रोजगार को मजबूत करने, मजदूरी भुगतान की प्रक्रिया को समयबद्ध और पारदर्शी बनाने तथा ग्राम सभा की भूमिका को निर्णायक बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। उन्होंने कहा कि इस कानून से गांवों की वास्तविक जरूरतों के अनुसार कार्य तय होंगे, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और ग्रामीण विकास को नई गति मिलेगी।
केन्द्रीय ग्रामीण विकास तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के लोनी बुद्रुक में आयोजित विशेष ग्राम सभा को संबोधित करते हुए विकसित भारत: जी राम जी एक्ट, 2025 को ग्रामीण भारत के लिए ऐतिहासिक कानून बताया। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम रोजगार के अधिकार को और अधिक मजबूत करता है तथा मजदूरों के हितों की कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
इस कार्यक्रम का देशभर में वेबकास्ट किया गया, जिसे 1 लाख से अधिक स्थानों से लगभग 60 लाख लोगों ने देखा। इसमें ग्रामीण नागरिकों, स्वयं सहायता समूहों, किसानों और पंचायत प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
श्री चौहान ने बताया कि नए कानून के तहत अब 125 दिनों के काम की कानूनी गारंटी दी गई है, जबकि पहले यह सीमा 100 दिन थी। साथ ही, यदि मजदूरों को समय पर काम नहीं मिलता तो बेरोजगारी भत्ते के प्रावधानों को भी और सशक्त किया गया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अब मजदूरी का भुगतान एक सप्ताह के भीतर अनिवार्य होगा। यदि 15 दिनों में भुगतान नहीं होता है, तो मजदूरों को 0.05 प्रतिशत अतिरिक्त राशि ब्याज के रूप में दी जाएगी। मंत्री ने कहा कि अब देरी करने वालों को उसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।
श्री शिवराज सिंह चौहान ने यह भी बताया कि इस अधिनियम के तहत गांव की जरूरत के अनुसार काम का फैसला ग्राम सभा करेगी। जल संरक्षण, बुनियादी ढांचा, आजीविका से जुड़े कार्य और आपदा प्रबंधन जैसे कामों को प्राथमिकता दी जाएगी।
महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि इस योजना में कम से कम 33 प्रतिशत कार्य महिलाओं को देना अनिवार्य किया गया है। साथ ही, कृषि के पीक सीजन में राज्य सरकारों को 60 दिनों तक मजदूरों को खेती कार्य में लगाने की अनुमति दी गई है।
इसके अलावा, प्रशासनिक व्यय को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत कर दिया गया है, ताकि रोजगार सहायकों के वेतन और भुगतान में किसी तरह की देरी न हो। श्री चौहान ने कहा कि देश की प्रगति गांवों से होकर गुजरती है और यह कानून ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर व सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।