राहवीर योजना: हादसे में मदद पर ₹25,000
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मध्य प्रदेश की राहवीर योजना के तहत सड़क हादसे में मदद करने वालों को ₹25,000 और सम्मान, लोगों को ‘गोल्डन ऑवर’ में सहायता के लिए प्रेरित किया जा रहा।
योजना में गंभीर घायलों की मदद पर पुरस्कार, जिला समिति करेगी मूल्यांकन, जागरूकता बढ़ाने और जान बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल।
BHOPAL/ सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को समय पर इलाज मिल सके, इसके लिए मध्य प्रदेश सरकार की ‘राहवीर योजना’ एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आई है। इस योजना का उद्देश्य आम नागरिकों को दुर्घटना पीड़ितों की मदद के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि ‘गोल्डन ऑवर’ के दौरान समय पर उपचार मिल सके और जान बचाई जा सके।
जिले की कलेक्टर Sonia Meena ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद करना सबसे बड़ा मानव धर्म है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी मददगार को पुलिस या कानूनी प्रक्रिया से डरने की जरूरत नहीं है। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि मदद करने वाले व्यक्ति को अनावश्यक रूप से न तो अस्पताल में रोका जाएगा और न ही पुलिस स्टेशन में पूछताछ के लिए परेशान किया जाएगा।
मोटर यान अधिनियम के अनुसार, दुर्घटना के बाद का पहला एक घंटा ‘गोल्डन ऑवर’ माना जाता है। इस दौरान यदि घायल को तुरंत अस्पताल पहुंचा दिया जाए, तो उसकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। इसी अहम समय का उपयोग सुनिश्चित करने के लिए यह योजना लागू की गई है।
योजना के तहत, जो व्यक्ति किसी दुर्घटना में घायल की मदद करता है और उसे अस्पताल पहुंचाता है, उसे 25,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि और प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा। यदि एक व्यक्ति एक या अधिक घायलों की मदद करता है, तो उसे पूरी राशि मिलेगी। वहीं, यदि कई लोग मिलकर एक घायल की मदद करते हैं, तो यह राशि आपस में बराबर बांटी जाएगी।
इसके अलावा, यदि एक समूह मिलकर कई घायलों को अस्पताल पहुंचाता है, तो प्रति पीड़ित 25,000 रुपये की राशि तय की गई है, लेकिन प्रति व्यक्ति अधिकतम सीमा 25,000 रुपये ही होगी।
पुरस्कार देने का निर्णय जिला स्तरीय समिति द्वारा लिया जाएगा, जो अस्पताल से मिले प्रमाण पत्र के आधार पर तय करेगी कि घायल की स्थिति गंभीर थी या नहीं। इसमें बड़ी सर्जरी, कम से कम तीन दिन तक अस्पताल में भर्ती रहना, मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट या इलाज के दौरान मृत्यु जैसी स्थितियों को शामिल किया गया है।
प्रशासन का मानना है कि इस योजना से लोगों में जागरूकता बढ़ेगी और वे बिना किसी डर के सड़क हादसों में घायल लोगों की मदद के लिए आगे आएंगे। यह पहल न केवल जीवन बचाने में सहायक होगी, बल्कि समाज में मानवता और जिम्मेदारी की भावना को भी मजबूत करेगी।