बस्तर में बड़ा सरेंडर: 40 लाख इनामी नक्सली समेत 18 ने छोड़ी हिंसा

Wed 25-Mar-2026,12:41 PM IST +05:30

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बस्तर में बड़ा सरेंडर: 40 लाख इनामी नक्सली समेत 18 ने छोड़ी हिंसा Bastar-Naxal-Surrender-Paparao-18-Cadres
  • बस्तर में 40 लाख इनामी नक्सली कमांडर पापाराव समेत 18 माओवादियों का सरेंडर, मिशन 2026 एंड गेम के तहत सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली।

  • मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बताया बड़ी उपलब्धि, दंडकारण्य में नक्सली नेटवर्क कमजोर, 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य करीब।

Chhattisgarh / Bastar :

बस्तर/ Chhattisgarh के बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान में सुरक्षा बलों को एक बड़ी सफलता मिली है। 40 लाख रुपये के इनामी कुख्यात नक्सली कमांडर पापाराव ने अपने 17 साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है। यह सरेंडर केंद्र सरकार द्वारा तय 31 मार्च 2026 की डेडलाइन से ठीक पहले हुआ है, जिसे अभियान की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, पापाराव Kistaram के निर्मलगुड़ा क्षेत्र का निवासी है और साउथ सब जोनल ब्यूरो का प्रमुख था। वह लंबे समय से सुरक्षा बलों के निशाने पर था। उसके साथ आत्मसमर्पण करने वालों में डीवीसीएम स्तर के दो अन्य इनामी नक्सली—प्रकाश मड़वी और अनिल ताती—भी शामिल हैं। इस समूह में कुल 18 माओवादी कैडर हैं, जिनमें 7 महिला नक्सली भी शामिल हैं।

इन सभी नक्सलियों पर कुल मिलाकर एक करोड़ रुपये से अधिक का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण के बाद ये सभी पुनर्वास प्रक्रिया के तहत अपने हथियार, जिनमें एके-47 राइफलें भी शामिल हैं, सुरक्षा बलों को सौंपेंगे।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह सरेंडर “मिशन 2026 एंड गेम” अभियान का सीधा परिणाम है। आईजी Sundarraj P ने इसे वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता बताया है। उनका कहना है कि लगातार दबाव और विकास कार्यों के कारण नक्सली अब मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।

पापाराव के आत्मसमर्पण से दंडकारण्य क्षेत्र में नक्सली संगठन को बड़ा झटका लगा है। इससे संगठन के नेतृत्व में कमी आएगी और नेटवर्क कमजोर होगा। अधिकारियों का मानना है कि इससे अन्य नक्सली कैडर भी आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित होंगे।

मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने इस सफलता को बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य अब करीब है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से नक्सलवाद की कमर टूट चुकी है। यह सरेंडर न केवल सुरक्षा बलों की रणनीति की सफलता को दर्शाता है, बल्कि बस्तर में शांति और विकास की दिशा में एक नई शुरुआत का संकेत भी देता है।