Voice of Seniors-8 इंदौर: सीनियर्स के सुरों ने जीता दिल, हरि दर्शन सिंह बने विजेता

Sun 22-Mar-2026,08:00 PM IST +05:30

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Voice of Seniors-8 इंदौर: सीनियर्स के सुरों ने जीता दिल, हरि दर्शन सिंह बने विजेता Voice of Seniors-8 Indore
  • ‘वॉइस ऑफ सीनियर्स-8’ में देशभर से वरिष्ठ प्रतिभागियों की भागीदारी. 

  • हरि दर्शन सिंह बने विजेता, 51 हजार का पुरस्कार. 

  • बुजुर्गों के हुनर और आत्मविश्वास को मिला मंच. 

Madhya Pradesh / Indore :

Indore / उम्र चाहे साठ पार कर जाए, लेकिन हुनर की चमक कभी फीकी नहीं पड़ती। इस बात का जीता-जागता उदाहरण एक बार फिर बना वॉइस ऑफ सीनियर्स का जिंदादिल मंच, जो एक या दो नहीं, बल्कि आठ संस्कारों का काफिला अपने साथ लिए आगे बढ़ चुका है। प्रतिष्ठित आनंदम सीनियर सिटीजन सेंटर, इंदौर द्वारा प्रेस्टीज इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग में रविवार को आयोजित 'वॉइस ऑफ सीनियर्स-8' के सफल आयोजन ने उन आवाज़ों को पहचान दी, जो धीमे-सधे कदमों से मंच पर पहुँचे और अपने अनुभव और भावनाओं की गहराई को सुरों में उतारा। यह प्रतियोगिता अब संपूर्ण देश में पहचान बना चुकी है, जिसमें कश्मीर से कन्याकुमारी तक के क्षेत्रों से वरिष्ठ प्रतिभागी अपने हुनर का परचम लहराने पहुँचे। मध्य प्रदेश, गुजरात, आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, दिल्ली, हरियाणा, जम्मू और कश्मीर, केरल, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल से वरिष्ठ प्रतिभागियों ने इस प्रतियोगिता में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया।

पूर्णतः निःशुल्क प्रतियोगिता में विजेता का खिताब इंदौर के श्री हरि दर्शन सिंह ने अपने नाम किया, जिन्हें 51,000 रुपए का नकद पुरस्कार प्रदान किया गया। वहीं, उपविजेता के रूप में करनाल, हरियाणा के सरदार आर पी सिंह को चुना गया, जिन्हें 21,000 रुपए की पुरस्कार राशि से सम्मानित किया गया। यह सिर्फ जीत नहीं, बल्कि उन सालों के अनुभव, संघर्ष और भीतर दबे सपनों की एक खूबसूरत पहचान बना, जिसे प्रतिभाशाली वरिष्ठजनों ने मंच पर खुलकर जीया।

मुख्य अतिथि के रूप में श्री अवधेश दवे, अध्यक्ष, कॉम्प फीडर्स ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, आईसेक्ट एवं मधुबन कॉलेज, इन्दौर उपस्थित रहे। उन्होंने कहा, "आज इन सुरों में मुझे सिर्फ संगीत नहीं, बल्कि जीवन के अनुभवों की गहराई सुनाई दी। यह मंच हमें सिखाता है कि सपनों और हुनर की कोई उम्र नहीं होती, सिर्फ और सिर्फ उन्हें जीने का हौंसला होना चाहिए।"

आनंदम सीनियर सिटीजन सेंटर के अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह ने कहा, "यह मंच हमारे बुज़ुर्गों के लिए सिर्फ गाने का अवसर नहीं, बल्कि खुद को फिर से पहचानने और जीने का माध्यम है। जब वे मंच पर आते हैं, तो उनके चेहरे की चमक और आत्मविश्वास हमें बताता है कि हमने सही दिशा में एक छोटा-सा लेकिन एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम उठाया है।"

संस्था के सचिव श्री एसबी खंडेलवाल ने भी भावुक होकर कहा, "हर वर्ष हमें लगता है कि इससे बेहतर शायद कुछ नहीं हो सकता, लेकिन हर बार हमारे सीनियर्स हमें गलत साबित कर देते हैं। इस बार भी जिस तरह की प्रतिभाएँ सामने आईं, उन्होंने यह साबित कर दिया कि उम्र सिर्फ एक संख्या है, यदि जीवंत कुछ है, तो वह है जुनून।"

हिंदी फिल्मों के लोकप्रिय गीतों पर आधारित इस अनूठी प्रतियोगिता में जब-जब कोई प्रतिभागी मंच पर आया, तो ऐसा लगा मानो उनकी पूरी जिंदगी सुरों में ढलकर सामने आ रही हो। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए वरिष्ठ प्रतिभागियों ने न सिर्फ गाया, बल्कि अपने हर गीत में यादों, एहसासों और जीवन के रंगों को पिरो दिया। ऑडिशन से लेकर सेमीफाइनल और फिर ग्रैंड फिनाले तक का सफर सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि भावनाओं की एक सुंदर यात्रा बन गया।

कार्यक्रम के दौरान लाइव ऑर्केस्ट्रा की धुनों पर जब सुर सजे, तो पूरा सभागार जैसे भावनाओं से भर गया। कहीं पुरानी यादें ताज़ा हुईं, तो कहीं मुस्कान और तालियों की गूँज ने माहौल को जीवंत बना दिया। हर प्रस्तुति ने यह एहसास कराया कि इन आवाज़ों में सिर्फ संगीत नहीं, बल्कि एक पूरा जीवन बोलता है।

'वॉइस ऑफ सीनियर्स-8' ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि कला की कोई उम्र नहीं होती। यह आयोजन सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं रहा, बल्कि उन अनकही कहानियों का उत्सव बन गया, जिन्हें अक्सर हम सुन ही नहीं पाते। यह मंच उन आवाज़ों को सम्मान देने का जरिया बना, जो कभी समय के साथ धीमी पड़ गई थीं, लेकिन आज फिर पूरे आत्मविश्वास के साथ गूँज उठीं।

गौरतलब है कि माता रामकौर मेमोरियल जन कल्याणिक ट्रस्ट द्वारा संचालित आनंदम सीनियर सिटीजन सेंटर न सिर्फ ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से बुज़ुर्गों को मंच देता है, बल्कि समाजसेवा के क्षेत्र में भी निरंतर सक्रिय है। वंचित वर्ग के स्कूलों में कंप्यूटर वितरण, मेधावी छात्रों को छात्रवृत्ति और बुज़ुर्गों के लिए हेल्थ चेकअप जैसे प्रयास इस संस्था की संवेदनशील सोच को दर्शाते हैं। आठ सफल संस्करणों के साथ 'वॉइस ऑफ सीनियर्स' अब एक ऐसा नाम बन चुका है, जो यह याद दिलाता है कि हर आवाज़ को सिर्फ एक अवसर चाहिए और फिर वह दुनिया तक अपनी पहचान खुद ही बना लेती है।