Rare Earth Magnet Plants: रेयर अर्थ मैग्नेट प्लांट के लिए ग्लोबल टेंडर, 7280 करोड़ की योजना
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भारत सरकार ने रेयर अर्थ मैग्नेट निर्माण के लिए 7280 करोड़ की योजना शुरू की, 6000 एमटीपीए क्षमता वाले संयंत्रों हेतु ग्लोबल टेंडर जारी
पारदर्शी एलसीएस प्रणाली के तहत दो चरणों में निविदा प्रक्रिया, पूंजी सब्सिडी और बिक्री प्रोत्साहन से उद्योग को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
इलेक्ट्रिक वाहन, पवन ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में उपयोगी मैग्नेट उत्पादन से आयात निर्भरता घटेगी और भारत वैश्विक बाजार में मजबूत बनेगा
नई दिल्ली/बिजनेस डेस्क। भारत सरकार के Ministry of Heavy Industries ने देश में उच्च-तकनीकी विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के निर्माण हेतु 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष क्षमता वाले संयंत्रों की स्थापना के लिए वैश्विक निविदा आमंत्रित की गई है। इस पहल का उद्देश्य भारत को इस रणनीतिक क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत स्थिति दिलाना है।
भारत में उन्नत विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करने के लिए Ministry of Heavy Industries ने सिंटर्ड एनडीएफईबी (NdFeB) रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) उत्पादन के लिए वैश्विक निविदा प्रक्रिया शुरू की है। इसके तहत 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MTPA) क्षमता वाले एकीकृत विनिर्माण संयंत्र स्थापित किए जाएंगे।
यह निविदा केंद्रीय सार्वजनिक खरीद (CPP) पोर्टल के माध्यम से दो चरणों तकनीकी और वित्तीय बोली में आयोजित की जाएगी। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी न्यूनतम लागत प्रणाली (LCS) के तहत ऑनलाइन संचालित होगी, जिससे निष्पक्षता और प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित की जा सके।
निविदा दस्तावेज 20 मार्च 2026 से उपलब्ध कर दिए गए हैं। इच्छुक कंपनियों के लिए 7 अप्रैल 2026 को प्री-बिड कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी। बोली जमा करने की अंतिम तिथि 28 मई 2026 तय की गई है, जबकि तकनीकी बोलियां 29 मई 2026 को खोली जाएंगी।
यह योजना नवंबर 2025 में Narendra Modi की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर की गई थी, जिसके लिए कुल 7,280 करोड़ रुपये का वित्तीय परिव्यय निर्धारित किया गया है। इस योजना का उद्देश्य देश में रेयर अर्थ मैग्नेट की पूरी वैल्यू चेन विकसित करना है, जिसमें कच्चे माल से लेकर तैयार उत्पाद तक का उत्पादन शामिल होगा।
योजना के अंतर्गत प्रत्येक चयनित लाभार्थी को 600 से 1,200 मीट्रिक टन प्रति वर्ष की उत्पादन क्षमता आवंटित की जाएगी। इसमें 750 करोड़ रुपये की पूंजीगत सब्सिडी और 6,450 करोड़ रुपये का बिक्री-आधारित प्रोत्साहन शामिल है। साथ ही, तीन सबसे कम बोली लगाने वाले आवेदकों को IREL (India) Limited से NdPr ऑक्साइड की सीमित आपूर्ति उपलब्ध कराई जाएगी।
रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट आधुनिक तकनीकी उद्योगों की रीढ़ माने जाते हैं। इनका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन ऊर्जा संयंत्रों, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर होता है। वर्तमान में भारत इन उत्पादों के लिए आयात पर निर्भर है, जिससे लागत और आपूर्ति जोखिम बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना से न केवल घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि भारत वैश्विक रेयर अर्थ मैग्नेट बाजार में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में उभर सकता है। इससे रोजगार सृजन, तकनीकी विकास और विदेशी निवेश को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
रेयर अर्थ मैग्नेट निर्माण के लिए यह पहल भारत की औद्योगिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे देश की तकनीकी क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती आने की उम्मीद है।