AI से विधानसभाएं बनेंगी ज्ञान केंद्र
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उपसभापति हरिवंश ने विधानसभाओं को ज्ञान केंद्र बनाने के लिए एआई आधारित साझा डिजिटल मंच और डेटा लेक विकसित करने पर जोर दिया।
संसदीय एआई के लिए मानव निगरानी युक्त हाइब्रिड मॉडल और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को लोकतंत्र के लिए आवश्यक बताया गया।
DELHI/ उपसभापति हरिवंश ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि एआई केवल तकनीकी उपकरण नहीं है, बल्कि यह विधायी ज्ञान को संरक्षित और सुलभ बनाने का माध्यम बन सकता है। उन्होंने कहा कि संसद और राज्य विधानसभाओं के पास दशकों की बहसें, निर्णय, परंपराएं और नीतिगत दस्तावेज मौजूद हैं, जिन्हें एक साझा डिजिटल मंच पर लाया जाना चाहिए। एआई आधारित ‘डेटा लेक’ के माध्यम से इन सभी संसाधनों को संरचित कर भारतीय संदर्भ के अनुरूप तकनीक विकसित की जा सकती है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में संसद में एआई आधारित ट्रांसक्रिप्शन और रियल-टाइम अनुवाद का परीक्षण किया जा रहा है, जिससे सांसद विभिन्न भाषाओं में कार्यवाही को समझ सकें। साथ ही, प्रश्नकाल में पूछे जाने वाले प्रश्नों की स्वीकार्यता, पूर्व उदाहरणों की खोज और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को भी एआई की सहायता से सरल बनाया जा सकता है।
हरिवंश ने इस बात पर विशेष बल दिया कि संसदीय एआई को संसद के भीतर उपलब्ध प्रमाणिक और सावधानीपूर्वक संकलित आंकड़ों से ही प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। उन्होंने एक हाइब्रिड प्रणाली का सुझाव दिया, जिसमें एआई के साथ मानव निगरानी अनिवार्य हो, ताकि सटीकता, विश्वसनीयता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने कहा कि कौशल बाहरी स्रोतों से प्राप्त किए जा सकते हैं, लेकिन संसदीय ज्ञान अद्वितीय होता है और वह संस्थागत अनुभव से निर्मित होता है। इसलिए एआई को इस ज्ञान के अनुरूप ढालना आवश्यक है। उपसभापति ने विधायकों और कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम बढ़ाने की भी आवश्यकता बताई।
सम्मेलन में डिजिटल उपकरणों के उपयोग, विधायकों की जवाबदेही बढ़ाने और क्षमता निर्माण जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा हुई। यह सम्मेलन 19 जनवरी को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की उपस्थिति में प्रारंभ हुआ था।