इस वर्ष रक्षा बजट में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है। कुल रक्षा व्यय 6.81 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 7.85 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो लगभग 15 प्रतिशत की वृद्धि है। खास बात यह है कि पूंजीगत व्यय में 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो 1.80 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2.31 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इसका मतलब है कि सरकार केवल नियमित खर्च ही नहीं, बल्कि आधुनिक हथियार प्रणालियों, नई तकनीक और स्वदेशी रक्षा विनिर्माण पर भी जोर दे रही है।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि रक्षा क्षेत्र का आधुनिकीकरण आज की जरूरत है। भूराजनीतिक हालात तेजी से बदल रहे हैं और ऐसे में सशस्त्र बलों को अत्याधुनिक संसाधनों से लैस करना सरकार का कर्तव्य है। हाल ही में फ्रांस के साथ 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए बड़े समझौते को भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
आर्थिक मोर्चे पर भी प्रधानमंत्री ने सरकार की रणनीति को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि मजबूत विनिर्माण, सेवा क्षेत्र और एमएसएमई की क्षमता ने भारत को 38 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों पर मजबूत स्थिति में बातचीत करने का अवसर दिया है। इन एफटीए का उद्देश्य कपड़ा, चमड़ा, रसायन, हस्तशिल्प और रत्न जैसे क्षेत्रों को वैश्विक बाजारों तक बेहतर पहुंच दिलाना है।
पूर्ववर्ती यूपीए सरकार की आलोचना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले आर्थिक कुप्रबंधन के कारण भारत की वार्ता क्षमता कमजोर रही। बातचीत लंबी चलती थी, लेकिन ठोस परिणाम नहीं निकलते थे। इसके विपरीत, वर्तमान सरकार सुधारों के प्रति प्रतिबद्ध है और उसे “शब्दों और भावना” दोनों में लागू कर रही है।
प्रधानमंत्री ने निजी क्षेत्र को आर्थिक परिवर्तन के अगले चरण में निर्णायक भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने उद्योग जगत से कहा कि वे केवल लाभ मार्जिन पर ध्यान न दें, बल्कि अनुसंधान एवं विकास, गुणवत्ता सुधार और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने में साहसिक निवेश करें। उनके अनुसार, विकसित भारत की दिशा में अगली छलांग नवाचार और दीर्घकालिक क्षमता निर्माण से ही संभव होगी।
डिजिटल क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने यूपीआई जैसी पहल को वैश्विक उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि भारत एआई पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है, जो युवा कार्यबल के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करेगा।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री का संदेश साफ था—राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक मजबूती और तकनीकी नेतृत्व के जरिए भारत एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है।