ICDS 2026: डैमचैट लॉन्च
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आईसीडीएस 2026 में एआई आधारित डैमचैट और जल शक्ति डेटा मंच लॉन्च, जिससे बांध सुरक्षा अनुपालन और डेटा विश्लेषण होगा अधिक प्रभावी।
मिनी और माइक्रो कैचमेंट क्षेत्रों के लिए नई डिज़ाइन फ्लड गाइडलाइंस जारी, छोटे बांधों की सुरक्षा और जोखिम मूल्यांकन को मिलेगी मजबूती।
Delhi/ आईसीडीएस 2026 बांध सुरक्षा, जल संसाधन प्रबंधन और जोखिम-सूचित नीति निर्माण के क्षेत्र में सहयोग, क्षमता निर्माण और ज्ञान साझा करने का एक व्यापक मंच बनकर उभरा है। सम्मेलन में भारत सहित विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर तकनीकी मानकों, नियामक ढांचे और बदलती जलवायु परिस्थितियों में बांधों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की रणनीतियों पर चर्चा की।
उद्घाटन सत्र में सबसे महत्वपूर्ण लॉन्च ‘डैमचैट’ रहा, जो एक एआई-पावर्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म है। इसे अंतरराष्ट्रीय बांध उत्कृष्टता केंद्र (आईसीईडी), आईआईटी रुड़की द्वारा विकसित किया गया है। यह प्लेटफॉर्म बांध मालिकों, इंजीनियरों और क्षेत्रीय अधिकारियों को वास्तविक समय में विनियामक दस्तावेजों, तकनीकी दिशानिर्देशों और अनुपालन आवश्यकताओं से संबंधित प्रश्नों के स्रोत-आधारित उत्तर प्रदान करता है। इससे जटिल नियमों को समझने और लागू करने की प्रक्रिया अधिक सरल और पारदर्शी होगी।
दूसरा प्रमुख लॉन्च ‘जल शक्ति-डेटा प्रबंधन मंच’ था, जिसे राष्ट्रीय जल सूचना विज्ञान केंद्र (एनडब्ल्यूआईसी) ने बीआईएसएजी-एन के तकनीकी सहयोग से विकसित किया है। यह मंच विभिन्न राष्ट्रीय और राज्य एजेंसियों से प्राप्त जल संबंधी आंकड़ों को एकीकृत कर विश्लेषण के लिए उपलब्ध कराता है। वर्तमान में 59 यूज़ केस विकसित किए गए हैं, जिनमें जल मात्रा, गुणवत्ता, जलवायु, अवसंरचना और पारिस्थितिकी से जुड़े डेटा शामिल हैं।
सम्मेलन में मिनी और माइक्रो कैचमेंट क्षेत्रों के लिए डिज़ाइन फ्लड हाइड्रोग्राफ के आकलन संबंधी नए दिशानिर्देश भी जारी किए गए। केंद्रीय जल आयोग द्वारा तैयार इन दिशानिर्देशों का उद्देश्य छोटे बांधों के लिए वैज्ञानिक और मानकीकृत बाढ़ अनुमान प्रणाली विकसित करना है। इससे बांध टूटने के जोखिम विश्लेषण और निचले क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों ने माना कि तकनीकी सत्रों और नीति विमर्श के माध्यम से आईसीडीएस 2026 देश में बांध अवसंरचना की सुरक्षा, लचीलापन और टिकाऊपन को नई दिशा देगा। डिजिटल प्लेटफॉर्म और पारदर्शी दिशानिर्देश मिलकर डेटा-आधारित निर्णय प्रक्रिया को मजबूत करेंगे और जल शासन को अधिक प्रभावी बनाएंगे।