कांकेर में तेज अभियान, मार्च 2026 तक नक्सलवाद खत्म

Sat 21-Feb-2026,04:23 PM IST +05:30

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कांकेर में तेज अभियान, मार्च 2026 तक नक्सलवाद खत्म Chhattisgarh-Anti-Naxal-Drive-Kanker-2026
  • कांकेर सहित छह नक्सल प्रभावित जिलों में संयुक्त सुरक्षा अभियान तेज, 2025 में 51 आत्मसमर्पण और 10 नक्सली मुठभेड़ों में ढेर।

  • जंगलों में बचे 24 हथियारबंद नक्सलियों की घेराबंदी, इनामी कमांडरों पर विशेष निगरानी और सीमावर्ती क्षेत्रों में सघन सर्च ऑपरेशन।

Chhattisgarh / Kanker :

KANKER/ छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक चरण की लड़ाई तेज हो गई है। केंद्र सरकार द्वारा चिन्हित छह नक्सल प्रभावित जिलों कांकेर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, सुकमा और गरियाबंद में सुरक्षा बलों ने अभियान को और सघन कर दिया है। बस्तर संभाग में अब नक्सली प्रभाव सीमित क्षेत्रों तक सिमट गया है और अधिकारियों का दावा है कि 31 मार्च 2026 से पहले इस समस्या का समूल उन्मूलन कर लिया जाएगा।

कांकेर जिले में बीते एक वर्ष में सुरक्षा बलों ने बड़ी सफलता हासिल की है। वर्ष 2025 के दौरान 51 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जबकि 10 नक्सली मुठभेड़ों में मारे गए। इसके बावजूद जिला अभी भी नक्सल प्रभावित श्रेणी में है, क्योंकि जंगलों में कुछ हथियारबंद नक्सली सक्रिय हैं। पुलिस के अनुसार वर्तमान में करीब 24 नक्सली कांकेर के वन क्षेत्रों में मौजूद हैं।

इनमें डीवीसीएम रैंक का इनामी नक्सली चंदर कत्लाम शामिल है, जिस पर आठ लाख रुपये का इनाम घोषित है। उसके साथ एसीएम रूपी भी सक्रिय बताई जा रही है। पुलिस का कहना है कि इनमें से 11 नक्सली कंपनी नंबर 5 से जुड़े हैं, जबकि अन्य परतापुर और रावघाट एरिया कमेटी के सदस्य हैं। हाल ही में महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में हुई मुठभेड़ में कंपनी नंबर 5 का कमांडर फागू मारा गया था, जिससे संगठन को बड़ा झटका लगा।

गढ़चिरौली एनकाउंटर के बाद उम्मीद थी कि शेष नक्सली आत्मसमर्पण करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके चलते कांकेर और सीमावर्ती इलाकों में संयुक्त सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है। सुरक्षा एजेंसियों ने माड़ क्षेत्र और महाराष्ट्र सीमा पर निगरानी बढ़ा दी है, जिससे नक्सलियों की आवाजाही पर प्रभाव पड़ा है।

सूत्रों के अनुसार कुछ नक्सली बदले की भावना से अब भी जंगलों में डटे हुए हैं। एसीएम रूपी का नाम प्रमुखता से सामने आया है, जो मारे गए नक्सली विजय रेड्डी से जुड़ी बताई जाती है। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा बलों की रणनीति से नक्सलियों की घेराबंदी लगभग पूरी हो चुकी है। एसपी निखिल राखेचा ने स्पष्ट किया है कि आत्मसमर्पण करने वालों के लिए पुनर्वास की व्यवस्था उपलब्ध है, लेकिन हिंसक गतिविधियों में शामिल रहने पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने भरोसा जताया कि तय समय-सीमा से पहले क्षेत्र को नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा।