उदयपुर चिंतन शिविर में भारत के खाद्य प्रसंस्करण सेक्टर को नई दिशा

Tue 20-Jan-2026,06:33 PM IST +05:30

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उदयपुर चिंतन शिविर में भारत के खाद्य प्रसंस्करण सेक्टर को नई दिशा Food-Processing-Chintan-Shivir-Udaipur
  • उदयपुर चिंतन शिविर में खाद्य प्रसंस्करण को किसानों की आय, रोजगार और निर्यात बढ़ाने का प्रमुख माध्यम बताया गया।

  • नवोन्मेष, डिजिटल प्लेटफॉर्म और ब्रांड इंडिया के जरिए वैश्विक खाद्य बाजार में भारत की स्थिति मजबूत करने पर जोर।

Rajasthan / Jaipur :

Jaipur/ उदयपुर में आयोजित इस दो दिवसीय चिंतन शिविर में 22 केंद्रीय मंत्रालयों, 27 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी, 30 से अधिक उद्योग प्रतिनिधि, शैक्षणिक संस्थान, एनआईएफटीईएम और इन्वेस्ट इंडिया के विशेषज्ञ शामिल हुए। इस मंच ने खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के समग्र विकास के लिए साझा दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।

उद्घाटन सत्र में केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि सरकार एक आधुनिक, प्रतिस्पर्धी और समावेशी खाद्य प्रसंस्करण तंत्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने, कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने, मूल्यवर्धन को प्रोत्साहित करने और युवाओं व महिलाओं के लिए रोजगार सृजन को प्राथमिकता बताया।

उन्होंने खाद्य प्रसंस्करण को कृषि मूल्य-श्रृंखला को सुदृढ़ करने, निर्यात बढ़ाने और भारत को उच्च गुणवत्ता वाले, टिकाऊ खाद्य उत्पादों का विश्वसनीय वैश्विक आपूर्तिकर्ता बनाने का अहम स्तंभ बताया। इस अवसर पर प्रौद्योगिकी और स्टार्टअप ग्रांट चैलेंज के विजेताओं की सफलता कथाओं पर आधारित विशेष प्रकाशन भी जारी किए गए।

शिविर में छह विषयगत समूहों के माध्यम से गहन विचार-विमर्श हुआ। इनमें अगले पांच वर्षों में खाद्य प्रसंस्करण स्तर को दोगुना करने की रणनीति, निर्यात संवर्धन, न्यूट्रास्यूटिकल्स और प्लांट-बेस्ड प्रोटीन जैसे उभरते क्षेत्रों का विकास, खाद्य सुरक्षा व गुणवत्ता, खेत से थाली तक मूल्य-श्रृंखला सुदृढ़ीकरण और पोषण से जुड़े मिथकों को दूर करना शामिल रहा।

इन समूहों ने एमएसएमई भागीदारी बढ़ाने, कोल्ड-चेन और लॉजिस्टिक्स अवसंरचना विस्तार, गुणवत्ता मानकों में सुधार, निर्यात-उन्मुख ढांचे, ब्रांड इंडिया को सशक्त करने और डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने जैसी व्यावहारिक सिफारिशें दीं।

राज्यों ने भी अपनी सर्वोत्तम कार्यप्रणालियां साझा कीं। उत्तर प्रदेश ने खाद्य पार्क, प्रोत्साहन योजनाओं और सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से क्षमता दोगुनी करने की रणनीति बताई। महाराष्ट्र ने पीएमएफएमई योजना में नेतृत्व, महिला उद्यमिता और फोर्टिफाइड खाद्य पर जोर दिया। आंध्र प्रदेश ने क्लस्टर आधारित मॉडल के सफल उदाहरण प्रस्तुत किए। छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड ने भी क्षेत्रीय विकास और निर्यात अनुकूलन पर केंद्रित पहलें साझा कीं।

शिविर के दौरान मंत्री चिराग पासवान ने उदयपुर की कृषि उपज मंडी समिति में कॉमन इन्क्यूबेशन सुविधा केंद्र का उद्घाटन किया, जो मसालों और लघु वन उत्पादों के प्रसंस्करण को बढ़ावा देगा। यह पीएमएफएमई योजना के तहत विकसित केंद्र स्थानीय उद्यमिता और आजीविका सृजन में सहायक होगा।

समापन सत्र में मंत्री ने सभी हितधारकों से समयबद्ध तरीके से सिफारिशों के क्रियान्वयन का आह्वान किया और कहा कि केंद्र, राज्य, उद्योग और संस्थानों के बीच निरंतर समन्वय भारत को खाद्य प्रसंस्करण में वैश्विक अग्रणी बनाएगा।