सोशल मीडिया और इंटरनेट पर वायरल हो रही तस्वीरों और वीडियो में देखा जा सकता है कि राष्ट्रपति पेजेशकियान सरकार समर्थकों के बीच बिना किसी औपचारिक मंच के मौजूद हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने हालिया सरकार विरोधी प्रदर्शनों के जवाब में अपने समर्थकों से बड़े शहरों में इकट्ठा होने की अपील की थी। इन रैलियों में शामिल लोग ईरान का राष्ट्रीय ध्वज लहराते हुए सरकार के समर्थन में नारे लगाते दिखाई दिए।
सरकार का दावा है कि देश में हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं। हालांकि जमीनी सच्चाई इससे अलग नजर आती है। बीते कुछ दिनों से ईरान के कई शहरों में व्यापक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जिनमें अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। मानवाधिकार एजेंसियों के अनुसार, ईरानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कम से कम 648 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्ती और बढ़ा दी है।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ईरान में देशभर में इंटरनेट ब्लैकआउट 90 घंटे से अधिक समय से जारी है। इससे न केवल आम लोगों का संपर्क बाधित हुआ है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी वहां की वास्तविक स्थिति की जानकारी हासिल करना मुश्किल हो गया है। मानवाधिकार संगठनों ने ईरानी सरकार पर बल प्रयोग और दमन की नीति अपनाने का आरोप लगाया है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरानी सरकार ने अमेरिका से बातचीत का प्रस्ताव रखा है। एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि उनका प्रशासन तेहरान के साथ बैठक आयोजित करने को लेकर बातचीत कर रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि हिंसा और मौतों का सिलसिला नहीं रुका, तो अमेरिका को मजबूत सैन्य विकल्पों पर विचार करना पड़ सकता है।
ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और सत्ताधारी सरकार अपने ही नागरिकों के खिलाफ “रेड लाइन” पार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ईरान ने खुद संपर्क किया है और बातचीत करना चाहता है, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए हर विकल्प खुले हैं।
कुल मिलाकर, ईरान इस समय गंभीर राजनीतिक और सामाजिक संकट से गुजर रहा है। एक ओर सरकार अपनी ताकत दिखाने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी ओर जनता के एक बड़े वर्ग का गुस्सा सड़कों पर साफ दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि हालात बातचीत से संभलते हैं या टकराव और गहराता है।