अमेरिका-इजरायल हमलों के बाद मिडिल ईस्ट में युद्ध जैसे हालात
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अमेरिका-इजरायल संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान की जवाबी ड्रोन और मिसाइल हमले, मिडिल ईस्ट में युद्ध जैसे हालात।
अबू धाबी और साइप्रस स्थित विदेशी सैन्य ठिकानों पर हमले से अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और ऊर्जा बाजार में बढ़ी चिंता।
मिडिल ईस्ट/ अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर लगातार तीसरे दिन की गई संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद पश्चिम एशिया में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। जवाबी रणनीति के तहत ईरान ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी और सहयोगी देशों के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। कई देशों ने एहतियातन अपना हवाई क्षेत्र अस्थायी रूप से बंद कर दिया है और नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। स्थिति युद्ध जैसे माहौल में बदलती दिख रही है।
संयुक्त हमलों के बाद ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में स्थित सैन्य अड्डों पर ड्रोन और मिसाइल हमले तेज कर दिए हैं। Abu Dhabi के बंदरगाह क्षेत्र में मौजूद फ्रांसीसी नौसैनिक अड्डे पर ड्रोन हमले में एक हैंगर को नुकसान पहुंचा है। फ्रांस के रक्षा मंत्रालय ने सीमित क्षति की पुष्टि की है, हालांकि किसी बड़े मानव नुकसान की सूचना नहीं है। विश्लेषकों का मानना है कि यह यूरोपीय सैन्य उपस्थिति को सीधा संदेश है।
इसी बीच RAF Akrotiri, जो Cyprus में ब्रिटेन का अहम एयरबेस है, पर भी संदिग्ध ड्रोन हमले की पुष्टि हुई है। ब्रिटिश रक्षा मंत्री John Healey ने कहा कि क्षेत्र में तैनात सैनिकों के बेहद करीब मिसाइल और ड्रोन गतिविधियां दर्ज की गई हैं, जिससे सुरक्षा जोखिम बढ़ गया है।
तनाव उस समय और गहरा गया जब ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei की मौत के बाद देशभर में आक्रोश फैल गया। Jamkaran Mosque पर लाल झंडा फहराया गया, जिसे बदले के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। तेहरान में बड़े पैमाने पर श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की गईं और प्रतिरोध का संदेश दिया गया।
यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर जिनेवा में वार्ता का तीसरा दौर हाल ही में संपन्न हुआ था। नई वार्ता प्रस्तावित थी, लेकिन ताजा सैन्य घटनाओं के बाद कूटनीतिक प्रक्रिया पर अनिश्चितता छा गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव शुरू हो गया है और कई एयरलाइंस ने मिडिल ईस्ट रूट पर उड़ानें सीमित कर दी हैं।
संयुक्त राष्ट्र सहित कई देशों ने संयम बरतने और तत्काल तनाव कम करने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले 48 घंटे बेहद अहम होंगे। यदि हमले और जवाबी कार्रवाई जारी रही, तो यह संघर्ष क्षेत्रीय दायरे से बाहर जाकर वैश्विक सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।