खामेनेई की हत्या के बाद युद्ध तेज, अरामको पर ईरान का हमला
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खामेनेई की हत्या के बाद ईरान-इजरायल युद्ध तेज, अमेरिकी ठिकानों और अरामको पर हमले से मिडिल ईस्ट में अस्थिरता बढ़ी।
ईरान ने 15 देशों में अमेरिकी सैन्य बेस निशाना बनाने का दावा किया, जबकि अमेरिका ने हथियार डालने की चेतावनी दी।
Iran Israel War/ मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद क्षेत्र में युद्ध की आग भड़क उठी है। ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर सीधे हमले तेज कर दिए हैं, जबकि दोनों देशों ने सैन्य अभियान जारी रखने की चेतावनी दी है। तेल ठिकानों से लेकर बैलिस्टिक मिसाइलों तक, यह संघर्ष अब वैश्विक ऊर्जा और सुरक्षा संतुलन को प्रभावित करने लगा है।
ईरान ने दावा किया है कि बीते 24 घंटों में उसने 15 से अधिक देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। हालांकि इन हमलों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। जवाबी कार्रवाई में इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान के सामरिक ठिकानों पर हमले किए, लेकिन अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने संकेत दिया है कि ईरान के परमाणु केंद्रों को कोई गंभीर नुकसान नहीं पहुंचा है।
इस बीच ईरान ने सऊदी अरब की प्रमुख तेल कंपनी Saudi Aramco के बड़े रिफाइनरी परिसर पर ड्रोन और मिसाइल हमले का दावा किया है। ऊर्जा बाजार में इससे भारी हलचल मच गई है और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल दर्ज किया गया।
इजरायल पर ईरान ने ‘खैबर’ बैलिस्टिक मिसाइल से हमला करने की बात कही है, जिसे उसकी सबसे घातक मिसाइलों में गिना जाता है। इजरायली रक्षा सूत्रों ने कुछ हमलों को नाकाम करने का दावा किया है, लेकिन सीमावर्ती इलाकों में भारी तनाव बना हुआ है।
खामेनेई की मौत के बाद ईरान की अंतरिम नेतृत्व परिषद की आपात बैठक हुई। इसमें राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, न्यायपालिका प्रमुख गुलाम हुसैन मोहसेनी एजेई और वरिष्ठ धार्मिक नेता अयातुल्ला अलीरेज़ा अराफी शामिल रहे। बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य रणनीति पर चर्चा की गई।
वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी सेना को हथियार डालने की चेतावनी दी है। अपने वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि अमेरिकी अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक सभी रणनीतिक लक्ष्य हासिल नहीं हो जाते।
इस बीच चीन के सरकारी अखबार Global Times ने दावा किया है कि ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद जिंदा और सुरक्षित हैं। पहले कुछ रिपोर्टों में उनके मारे जाने की बात कही गई थी, लेकिन अब इसे खारिज किया गया है विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो यह संघर्ष व्यापक क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ेगा।