इस पूरे विवाद पर स्थिति स्पष्ट करते हुए शिक्षा निदेशक वेदिता रेड्डी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा यह दावा पूरी तरह से गलत, मनगढ़ंत और भ्रामक है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि शिक्षा निदेशालय ने ऐसा कोई आदेश या निर्देश कभी जारी नहीं किया। उनके अनुसार, शिक्षक केवल और केवल शैक्षणिक कार्यों में संलग्न हैं और उन्हें किसी भी गैर-शैक्षणिक गतिविधि के लिए नहीं लगाया गया है। उन्होंने इसे एक शरारतपूर्ण और दुर्भावनापूर्ण नैरेटिव करार दिया, जिसका उद्देश्य शिक्षा विभाग की छवि को नुकसान पहुंचाना है।
निदेशालय का कहना है कि इस तरह की भ्रामक सूचनाओं के कारण शिक्षकों और अभिभावकों के बीच अनावश्यक भ्रम और असमंजस की स्थिति पैदा हुई है। शिकायत में यह भी बताया गया है कि कुछ लोग खुद को शिक्षक बताकर आवारा कुत्तों की गिनती करते हुए वीडियो बना रहे हैं और उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर रहे हैं। इससे न केवल गलत जानकारी फैल रही है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की साख पर भी असर पड़ रहा है।
DOE ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे पोस्ट, वीडियो और उनसे जुड़ी टाइमलाइन के डिजिटल साक्ष्य एकत्र कर लिए गए हैं और उन्हें पुलिस को सौंप दिया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अज्ञात और शरारती तत्व जानबूझकर झूठी और भ्रामक जानकारी फैला रहे हैं, जिससे विभाग की छवि को नुकसान पहुंचा है और सार्वजनिक विश्वास तथा व्यवस्था प्रभावित हुई है।
शिक्षा निदेशालय ने दोहराया कि संबंधित सर्कुलर में कहीं भी आवारा कुत्तों की गिनती का कोई उल्लेख नहीं है। इस मुद्दे पर विभाग पहले ही आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी कर चुका है, इसके बावजूद कुछ लोग शिक्षक बनकर वीडियो बना रहे हैं और झूठी जानकारी फैलाने से बाज नहीं आ रहे हैं। इसे गंभीर मामला बताते हुए निदेशालय ने तत्काल जांच और सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 353(2), 196, 221 और 299 के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66D और धारा 67 का उल्लेख किया गया है। शिक्षा निदेशालय ने पुलिस से एफआईआर दर्ज कर भ्रामक सामग्री के स्रोत, उसे फैलाने वालों और आगे प्रसारित करने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।