डॉ जितेंद्र सिंह की अध्यक्षता में हिंदी सलाहकार समिति ने विज्ञान में हिंदी प्रसार पर चर्चा की

Wed 31-Dec-2025,06:14 PM IST +05:30

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डॉ जितेंद्र सिंह की अध्यक्षता में हिंदी सलाहकार समिति ने विज्ञान में हिंदी प्रसार पर चर्चा की Hindi Advisory Committee Science Communication
  • बैठक में डिजिटल रिपॉजिटरी, क्विज प्रतियोगिता और डीप ओशन मिशन जैसी योजनाओं से विद्यार्थियों की सहभागिता बढ़ाने पर जोर।

  • हिंदी अब रोजगार और अवसरों की भाषा बन रही है, मंत्रालय में वैज्ञानिक संचार और छात्रों के लिए सटीक सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।

Delhi / New Delhi :

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की अध्यक्षता में आज पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति की बैठक पृथ्वी भवन, नई दिल्ली में आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य हिंदी के माध्यम से वैज्ञानिक ज्ञान का व्यापक प्रसार, जनभागीदारी को सशक्त बनाना और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना था।

बैठक में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि हिंदी केवल भाषा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना और समावेशी संवाद का माध्यम है। उन्होंने बताया कि मंत्रालय में तमिलनाडु से जुड़े अधिकारियों के नेतृत्व में हिंदी कार्यों को नई गति मिली है। इसके माध्यम से “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना और मजबूत होगी। उन्होंने वैज्ञानिक शब्दावली की प्रामाणिकता बनाए रखते हुए हिंदी के माध्यम से सरल और सटीक संचार पर जोर दिया, ताकि छात्रों और शोधार्थियों को किसी भी स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान न हो।

डॉ. सिंह ने डिजिटल रिपॉजिटरी के माध्यम से आधुनिक भारतीय वैज्ञानिकों की उपलब्धियों को प्रदर्शित करने, राष्ट्रीय स्तर पर क्विज प्रतियोगिताएं और चैलेंज आधारित आउटरीच कार्यक्रम आयोजित करने की योजना की भी चर्चा की। डीप ओशन मिशन और अन्य राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रमों में विद्यार्थियों की सहभागिता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

उन्होंने बताया कि हिंदी अब रोजगार और अवसरों की भाषा बन रही है, कॉरपोरेट और बहुराष्ट्रीय कंपनियों में हिंदी जानने वाले युवाओं को प्राथमिकता मिल रही है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में समुद्र विज्ञान, भूकंपीय अध्ययन और मौसम विज्ञान में भारत वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभाएगा।

बैठक में सुझावों पर चर्चा के बाद डॉ. सिंह ने सभी सदस्यों से आह्वान किया कि वे औपचारिक बैठकों के अलावा ई-मेल या प्रत्यक्ष संवाद के माध्यम से मंत्रालय तक सुझाव भेजते रहें, ताकि सभी व्यवहारिक सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जा सके।