स्वदेशी टीडी वैक्सीन लॉन्च
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स्वदेशी टीडी वैक्सीन का शुभारंभ, आत्मनिर्भर भारत के तहत राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा और सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम को नई मजबूती।
कोविड-19 अनुभव के बाद भारत की वैश्विक टीका निर्माण क्षमता और डिजिटल स्वास्थ्य अवसंरचना को और सशक्त करने की पहल।
New Delhi/ भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जेपी नड्डा ने हिमाचल प्रदेश के कसौली स्थित केंद्रीय अनुसंधान संस्थान में स्वदेशी टेटनस और वयस्क डिप्थीरिया (टीडी) वैक्सीन का शुभारंभ किया। यह पहल आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति देने के साथ-साथ सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम को सशक्त बनाने की दिशा में मील का पत्थर मानी जा रही है।
हिमाचल प्रदेश के कसौली स्थित केंद्रीय अनुसंधान संस्थान (सीआरआई) में आयोजित समारोह में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने स्वदेशी रूप से निर्मित टेटनस और वयस्क डिप्थीरिया (टीडी) वैक्सीन का औपचारिक शुभारंभ किया। उन्होंने इसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा को सुदृढ़ करने वाला ऐतिहासिक कदम बताया।
अपने संबोधन में मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस प्रगति हुई है। स्वदेशी टीडी वैक्सीन का उत्पादन इसी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि अब इस वैक्सीन को सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (यूआईपी) के तहत आपूर्ति के लिए शामिल कर लिया गया है।
सीआरआई अप्रैल 2026 तक यूआईपी को 55 लाख खुराकें उपलब्ध कराएगा। आने वाले वर्षों में उत्पादन क्षमता बढ़ाकर देश की आवश्यकताओं को पूर्णतः घरेलू स्तर पर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। मंत्री ने कहा कि भारत पहले से ही “विश्व की औषधालय” के रूप में प्रतिष्ठित है और वैश्विक टीका निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने कोविड-19 काल का उल्लेख करते हुए बताया कि भारत ने नौ महीनों के भीतर स्वदेशी टीके विकसित कर 220 करोड़ से अधिक खुराकें प्रदान कीं। डिजिटल प्रमाणपत्र वितरण और व्यापक टीकाकरण अभियान ने भारत की तकनीकी और प्रशासनिक क्षमता को प्रदर्शित किया।
मंत्री ने बताया कि यूआईपी विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण कार्यक्रम है, जिसके तहत 12 टीकों से रोके जा सकने वाले रोगों के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान की जाती है। हर वर्ष लगभग 2 से 2.5 करोड़ बच्चों और समान संख्या में गर्भवती महिलाओं को लाभ मिलता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से लाभार्थियों की निगरानी की जाती है, जिससे टीकाकरण कवरेज लगभग 99 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।
उन्होंने आयुष्मान भारत योजना का भी उल्लेख किया, जिसके अंतर्गत 62 करोड़ से अधिक लोग स्वास्थ्य बीमा सुरक्षा प्राप्त कर रहे हैं। संस्थागत प्रसव दर में वृद्धि और मातृ-शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार को उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में निरंतर नीतिगत हस्तक्षेपों का परिणाम बताया।
समारोह में स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, राज्य प्रतिनिधि और जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ उपस्थित रहे। इस पहल को भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे को और अधिक आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।