विदेशी बैंकों की भारत में एंट्री पर IDC बैठक, RBI प्रस्तावों को मिली सैद्धांतिक अनुशंसा
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Foreign Banks India Idc Meeting RBI
विदेशी बैंकों की भारत में शाखाएं और सहायक कंपनियां खोलने के प्रस्तावों पर आईडीसी ने सुरक्षा और आर्थिक दृष्टिकोण से विचार किया।
सरकार का उद्देश्य वैश्विक बैंकिंग निवेश को प्रोत्साहित कर भारतीय वित्तीय प्रणाली को अधिक सशक्त और प्रतिस्पर्धी बनाना है।
New Delhi/ भारत में विदेशी बैंकों की उपस्थिति से जुड़े प्रस्तावों पर विचार के लिए आज वित्तीय सेवा विभाग के सचिव श्री एम. नागराजू की अध्यक्षता में अंतर-विभागीय समिति (IDC) की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, वाणिज्य विभाग तथा भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
यह बैठक उन विदेशी बैंकों के प्रस्तावों पर विचार हेतु बुलाई गई थी, जो भारत में अपनी शाखाएं, प्रतिनिधि कार्यालय या सहायक कंपनियां स्थापित करना चाहते हैं। ये प्रस्ताव भारतीय रिज़र्व बैंक के माध्यम से अंतर-विभागीय समिति को भेजे गए थे।
बैठक के दौरान विस्तृत विचार-विमर्श के बाद समिति ने अपने समक्ष रखे गए प्रस्तावों की अनुशंसा की। प्रस्तावों का मूल्यांकन राष्ट्रीय सुरक्षा, राजनीतिक स्थिरता, आर्थिक प्रभाव और अंतरराष्ट्रीय संबंधों जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को ध्यान में रखकर किया गया।
अंतर-विभागीय समिति में वित्तीय सेवा विभाग नोडल विभाग की भूमिका निभाता है। समिति विदेशी एवं घरेलू बैंकों से प्राप्त आवेदनों का गहन परीक्षण करती है और अंतिम निर्णय से पहले संबंधित मंत्रालयों एवं विभागों से परामर्श कर आम सहमति बनाती है।
सरकार का यह कदम भारत की बैंकिंग प्रणाली को वैश्विक स्तर पर मजबूत करने, निवेश वातावरण में पारदर्शिता लाने और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में अहम माना जा रहा है। इससे देश में वित्तीय समावेशन, प्रतिस्पर्धा और बैंकिंग सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है।