इंदौर दूषित पानी संकट गहराया

Wed 21-Jan-2026,12:24 PM IST +05:30

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इंदौर दूषित पानी संकट गहराया Indore-Contaminated-Water-Crisis-Bhagirathpura-Deaths
  • इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से मरने वालों की संख्या बढ़कर 25, स्वास्थ्य संकट और गहराया।

  • दूषित पानी से अब तक एक हजार से ज्यादा लोग बीमार, 20 से अधिक अस्पताल में भर्ती, सात की हालत गंभीर।

Madhya Pradesh / Indore :

Indore/ मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से फैला स्वास्थ्य संकट थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार सुबह इलाज के दौरान एक और मरीज की मौत के बाद इस त्रासदी में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 25 हो गई है। इस घटना ने स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जबकि इलाके में भय और आक्रोश का माहौल बना हुआ है।

मृतक की पहचान 51 वर्षीय हेमंत गायकवाड़ के रूप में हुई है, जो पेशे से ई-रिक्शा चालक थे। जानकारी के अनुसार, करीब एक महीने पहले दूषित पानी पीने के बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। 22 दिसंबर को उल्टी-दस्त की गंभीर शिकायत के चलते उन्हें परदेशीपुरा स्थित वर्मा नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। इलाज के बाद कुछ सुधार होने पर उन्हें छुट्टी दे दी गई, लेकिन कुछ ही दिनों में उनकी हालत दोबारा बिगड़ गई।

इसके बाद करीब 15 दिन पहले हेमंत को अरविंदो अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका लगातार इलाज चला। बावजूद इसके, बुधवार सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया। डॉक्टरों के अनुसार, उल्टी-दस्त के साथ अन्य गंभीर संक्रमण और जटिलताओं के चलते उनकी स्थिति लगातार खराब होती चली गई।

हेमंत अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। उनके परिवार में चार बेटियां हैं, जो सभी पढ़ाई कर रही हैं। परिवार का कहना है कि इस हादसे ने उन्हें आर्थिक और मानसिक रूप से तोड़ कर रख दिया है। परिजनों ने दूषित पानी की आपूर्ति को इस त्रासदी की मुख्य वजह बताया है।

एक हजार से अधिक लोग बीमार

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, दूषित पानी के कारण अब तक करीब एक हजार से ज्यादा लोग बीमार पड़ चुके हैं। फिलहाल 20 से अधिक मरीज विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें से सात की हालत गंभीर बनी हुई है और उन्हें आईसीयू में रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग हालात पर नजर बनाए हुए है, लेकिन संक्रमण की गंभीरता चिंता बढ़ा रही है।

अब तक हुई 25 मौतों में अधिकांश महिलाएं शामिल हैं। इसके अलावा 40 वर्ष से कम उम्र के तीन लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि मृतकों में छह माह का एक मासूम बच्चा भी शामिल है। यह आंकड़े संकट की भयावहता को दर्शाते हैं।

प्रशासन पर उठ रहे सवाल

इलाके के लोगों का कहना है कि दूषित पानी की शिकायतें पहले भी की गई थीं, लेकिन समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब मांग की जा रही है कि प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिया जाए और जल आपूर्ति व्यवस्था की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की त्रासदी दोबारा न हो।