आयुष्मान भारत में संदिग्ध सर्जरी, ओडिशा मरीजों पर जांच

Mon 02-Mar-2026,12:10 PM IST +05:30

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आयुष्मान भारत में संदिग्ध सर्जरी, ओडिशा मरीजों पर जांच Ayushman-Bharat-Odisha-Surgery-Probe-Chhattisgarh
  • आयुष्मान भारत योजना में ओडिशा मरीजों की संदिग्ध सर्जरी पर एनएचए की सख्त नजर, छोटे अस्पतालों के असामान्य क्लेम पैटर्न की जांच शुरू।

  • डिजिटल पोर्टल पर अधूरी जानकारी देने वाले अस्पतालों के क्लेम ऑटो रिजेक्ट, एमबीबीएस डॉक्टर अनिवार्यता नियम पर सख्ती बढ़ी।

Chhattisgarh / Raipur :

Raipur/ आयुष्मान भारत योजना के तहत सामने आए कथित “फॉल्स ट्रिगर” मामलों ने छत्तीसगढ़ के निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासतौर पर ओडिशा से बड़ी संख्या में आए मरीजों की सर्जरी को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई गई है। हालिया समीक्षा में यह पाया गया कि कुछ छोटे निजी अस्पतालों में पाइल्स और हाइड्रोसिल जैसे ऑपरेशनों का असामान्य पैटर्न सामने आया है, जिससे जांच की जरूरत महसूस की गई है।

सूत्रों के अनुसार, नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (एनएचए) की ऑनलाइन समीक्षा बैठक में ओडिशा सरकार द्वारा भेजी गई रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा हुई। रिपोर्ट में दावा किया गया कि सीमित संसाधनों वाले कुछ निजी अस्पतालों में ओडिशा के मरीजों की संख्या अचानक बढ़ी है। खास बात यह है कि इनमें से अधिकांश मरीज एक ही भौगोलिक क्षेत्र से जुड़े बताए जा रहे हैं।

बताया जा रहा है कि 50 से कम बेड वाले अस्पतालों में बड़ी संख्या में सर्जरी दर्ज की गई, जो सामान्य रुझान से अलग है। इससे कमीशन आधारित रेफरल सिस्टम की आशंका जताई जा रही है। चर्चा है कि एजेंटों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों से मरीजों को चुनिंदा अस्पतालों तक लाया गया। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

एनएचए ने राज्य स्तरीय निगरानी एजेंसी को मामले की प्राथमिक जांच के निर्देश दिए हैं। स्टेट नोडल एजेंसी (एसएनए) से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। होली के बाद ओडिशा और छत्तीसगढ़ के अधिकारियों की संयुक्त टीम द्वारा फील्ड विजिट की संभावना भी जताई जा रही है।

इधर, नए डिजिटल क्लेम सिस्टम ने भी कई अस्पतालों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। 20 बेड पर एक एमबीबीएस डॉक्टर की अनिवार्यता का पालन नहीं करने वाले अस्पतालों के क्लेम स्वतः रिजेक्ट हो रहे हैं। एआई आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम अधूरी या गलत जानकारी को तुरंत चिन्हित कर रहा है, जिससे क्लेम अस्वीकृति की दर बढ़ी है।

गौरतलब है कि पहले भी ओडिशा के बीजू स्वास्थ्य कार्ड धारकों के इलाज को लेकर सवाल उठे थे। अब आयुष्मान योजना के तहत भी समान पैटर्न सामने आने से निगरानी और सख्त किए जाने की चर्चा है।

यदि जांच में अनियमितता साबित होती है, तो संबंधित अस्पतालों को पैनल से हटाया जा सकता है, भुगतान रोका जा सकता है या दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। स्वास्थ्य योजनाओं की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर सतर्कता बढ़ाने की तैयारी है।