NH-45 पर शहपुरा रेल ओवर ब्रिज गिरा
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एनएच-45 पर शहपुरा में बना रेल ओवर ब्रिज गिरा, 628 करोड़ रुपये की परियोजना की गुणवत्ता और निगरानी पर गंभीर सवाल।
जबलपुर-भोपाल मार्ग बाधित, यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग से लंबा चक्कर लगाने की मजबूरी और जांच की मांग तेज।
jabalpur/ मध्य प्रदेश की राजधानी को संस्कारधानी जबलपुर से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-45 पर रविवार को बड़ा बुनियादी ढांचा संकट खड़ा हो गया। जबलपुर मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर शहपुरा में बना रेल ओवर ब्रिज (ROB) अचानक भरभराकर गिर गया। महज पांच साल पहले तैयार हुए इस फ्लाईओवर के ढहने से निर्माण गुणवत्ता, निगरानी तंत्र और जिम्मेदार एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। हादसे के बाद मुख्य मार्ग को एहतियातन बंद कर दिया गया है।
जानकारी के अनुसार शहपुरा में स्थित फोर-लेन रेल ओवर ब्रिज का चालू हिस्सा अचानक टूटकर गिर पड़ा। उल्लेखनीय है कि इसी ब्रिज का एक भाग पिछले वर्ष दिसंबर में जर्जर स्थिति के कारण क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके बाद उसे मरम्मत के नाम पर बंद रखा गया था। प्रशासन ने दूसरे हिस्से से यातायात जारी रखा, लेकिन रविवार को वह हिस्सा भी भारी दबाव और कथित खराब निर्माण गुणवत्ता के चलते ढह गया।
यह मार्ग अंधमूक बायपास से हिरन नदी तक 54 किलोमीटर लंबा है, जिसका निर्माण Madhya Pradesh Road Development Corporation की देखरेख में पैकेज-1 के तहत हुआ था। इस परियोजना पर लगभग 628.45 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। निर्माण कार्य नवंबर 2015 में शुरू हुआ और जनवरी 2020 में पूर्ण घोषित किया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि पुल अभी गारंटी अवधि में ही था, फिर भी सड़क पर दरारें और अब ब्रिज का गिरना गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
एमपीआरडीसी के कार्यपालन यंत्री संजय मोरे के अनुसार निर्माण एजेंसियां-मेसर्स वागड़ इंफ्रा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड और मेसर्स सोराठिया—को खराब गुणवत्ता के कारण हाल ही में ब्लैक लिस्ट किया गया था। वहीं National Highways Authority of India के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अमृत लाल साहू ने स्पष्ट किया कि भले ही टोल वसूली एनएचएआई कर रहा है, लेकिन निर्माण उन्होंने नहीं कराया और खामियों के कारण अब तक हैंडओवर स्वीकार नहीं किया गया।
जब सड़क पर चौड़ी दरारों और कंक्रीट उखड़ने की शिकायतें सामने आईं, तो कुछ अधिकारियों ने क्षेत्र की ‘काली मिट्टी’ को जिम्मेदार बताया। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि निर्माण से पूर्व मृदा परीक्षण अनिवार्य होता है, इसलिए यह तर्क तकनीकी रूप से कमजोर है। फ्लाईओवर ढहने से जबलपुर-भोपाल मार्ग पूरी तरह बाधित हो गया है। अब वाहनों को पाटन रोड या चरगवां रोड से लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष संजय यादव ने उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए इसे भ्रष्टाचार का परिणाम बताया है।