राजस्थान निकाय चुनाव परिणाम: BJP को बढ़त, 4,023 वार्डों में जीत, कांग्रेस को 3,438 सीटें
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Rajasthan Nikay Chunav Result
राजस्थान निकाय चुनाव में भाजपा ने 4,023 वार्डों में जीत दर्ज कर बढ़त बनाई।
कांग्रेस को 3,438 वार्डों में सफलता मिली, जबकि निर्दलीय भी मजबूत रहे।
21 सितंबर 2026 को महापौर, सभापति और चेयरमैन पदों के चुनाव होंगे।
Jaipur / राजस्थान में नगर निकाय चुनावों के परिणाम सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने बढ़त बना ली है। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से 309 नगरीय निकायों—नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिकाओं—के लिए कराए गए चुनावों की मतगणना के बाद अधिकांश वार्डों के नतीजे घोषित कर दिए गए हैं। उपलब्ध परिणामों के अनुसार, भाजपा ने सबसे अधिक वार्डों में जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस दूसरे स्थान पर रही। निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी कई वार्डों में प्रभावशाली प्रदर्शन किया है।
राजस्थान में नगर निकाय चुनाव दो चरणों में आयोजित किए गए थे। पहले चरण का मतदान 9 सितंबर 2026 को हुआ, जिसमें 162 नगरीय निकायों के लिए मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इसके बाद 11 सितंबर 2026 को दूसरे चरण में 147 नगरीय निकायों के लिए मतदान कराया गया। दूसरे चरण में जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर, अजमेर और बीकानेर जैसे प्रमुख नगर निगम भी शामिल रहे।
दोनों चरणों को मिलाकर राज्य में कुल 10,167 वार्डों के लिए मतदान हुआ था। इसके बाद सोमवार सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू की गई। चुनाव परिणामों के अनुसार, राजस्थान के 9,896 वार्डों के घोषित नतीजों में भाजपा ने 4,023 वार्डों पर जीत दर्ज की है। कांग्रेस के खाते में 3,438 वार्ड आए हैं, जबकि 2,435 वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे हैं। कुछ अन्य राजनीतिक दलों और स्थानीय उम्मीदवारों ने भी अलग-अलग निकायों में सफलता हासिल की है।
हालांकि, अलग-अलग चरणों और वार्डों के आंकड़ों में कुछ अंतर सामने आया है। एक अन्य समेकित आंकड़े के अनुसार, भाजपा ने 4,026 वार्डों, कांग्रेस ने 3,438 वार्डों और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 2,436 वार्डों पर जीत दर्ज की है। अंतिम आधिकारिक आंकड़े राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी किए जाने के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होंगे।
प्रमुख नगर निगमों में भाजपा-कांग्रेस का प्रदर्शन
राज्य के प्रमुख नगर निगमों के परिणामों में भी भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। अजमेर नगर निगम के 80 वार्डों में भाजपा ने 32 और कांग्रेस ने 37 वार्डों पर जीत दर्ज की। अलवर नगर निगम के 65 वार्डों में भाजपा को 28 और कांग्रेस को 23 वार्ड मिले।
उदयपुर नगर निगम में भाजपा का प्रदर्शन मजबूत रहा। यहां 80 वार्डों में से भाजपा ने 53 पर जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस 23 वार्डों तक सीमित रही। कोटा नगर निगम के 100 वार्डों में भाजपा ने 51 और कांग्रेस ने 35 वार्डों पर कब्जा किया।
राजधानी जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में भाजपा ने 69 और कांग्रेस ने 50 वार्डों में जीत दर्ज की। जोधपुर नगर निगम में दोनों प्रमुख दलों के बीच बराबरी का मुकाबला रहा। यहां भाजपा और कांग्रेस दोनों ने 44-44 वार्डों पर जीत हासिल की।
पाली नगर निगम के 65 वार्डों में कांग्रेस ने 29 और भाजपा ने 21 वार्डों पर जीत दर्ज की। बीकानेर नगर निगम के 80 वार्डों में कांग्रेस ने 42 वार्ड जीतकर बढ़त बनाई, जबकि भाजपा को 27 वार्ड मिले। भरतपुर नगर निगम में अन्य उम्मीदवारों का प्रदर्शन बेहतर रहा, जहां अन्य के खाते में 38 वार्ड, भाजपा के खाते में 20 और कांग्रेस के खाते में 7 वार्ड आए।
भीलवाड़ा नगर निगम में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 70 में से 45 वार्डों पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस को केवल 10 वार्डों में सफलता मिली।
केजरीवाल ने बताया बदलाव की शुरुआत
राजस्थान निकाय चुनाव परिणामों पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में अब बदलाव की हवा चलने लगी है। केजरीवाल के अनुसार, शिक्षा मंत्री के इलाके बारां में आम आदमी पार्टी की ‘झाड़ू’ चली है और पार्टी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है।
केजरीवाल ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से राजस्थान के बदहाल सरकारी स्कूलों के वीडियो सोशल मीडिया पर लगातार सामने आ रहे थे, जिससे जनता में नाराजगी बढ़ रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और भाजपा ने पूरे राज्य की स्थिति खराब कर दी है और लोग दोनों दलों की कथित जुगलबंदी से परेशान हैं। उन्होंने दावा किया कि अब जनता के पास आम आदमी पार्टी के रूप में एक मजबूत विकल्प मौजूद है।
21 सितंबर को होगा अध्यक्ष पदों का चुनाव
नगर निकाय चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद अब अध्यक्षीय पदों के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 21 सितंबर 2026 को महापौर, नगर परिषद सभापति और नगरपालिका चेयरमैन पदों के लिए चुनाव आयोजित किए जाएंगे। इन पदों को लेकर भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों के बीच राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है।
निकाय चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवारों के प्रदर्शन को देखते हुए अध्यक्ष पदों के चुनाव में उनका रुख महत्वपूर्ण हो सकता है। कई नगर निकायों में भाजपा या कांग्रेस को बहुमत के लिए निर्दलीय पार्षदों के समर्थन की आवश्यकता पड़ सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में जोड़-तोड़ और राजनीतिक समीकरणों पर सभी की नजर रहेगी।