मिडिल ईस्ट संकट पर भारत की कूटनीतिक सक्रियता

Mon 02-Mar-2026,01:31 PM IST +05:30

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PM Modi Israel Call
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Delhi / Delhi :

Delhi / मिडिल ईस्ट में तेजी से बिगड़ते हालात के बीच भारत ने संतुलित और सक्रिय कूटनीति का संकेत दिया है। रविवार (1 मार्च) रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत कर मौजूदा स्थिति पर गहरी चिंता जताई। पीएम मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी संघर्ष में आम नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने हाल के घटनाक्रम पर भारत की चिंताओं को सामने रखते हुए तनाव कम करने और जल्द से जल्द हिंसा समाप्त करने की आवश्यकता दोहराई।

इससे पहले प्रधानमंत्री ने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से भी फोन पर बात की। यूएई में हुए हमलों की कड़ी निंदा करते हुए उन्होंने जानमाल के नुकसान पर दुख व्यक्त किया और इस कठिन समय में भारत की एकजुटता का भरोसा दिलाया। बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने यूएई में रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा का विशेष रूप से उल्लेख किया और वहां की सरकार द्वारा भारतीयों का ध्यान रखने के लिए आभार भी जताया।

इजरायल-ईरान टकराव और बढ़ता क्षेत्रीय तनाव
इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बिगड़े हैं। कई देश इस टकराव की चपेट में आ चुके हैं। क्षेत्र में अस्थिरता, जवाबी हमलों और बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्टों के मुताबिक, हमलों में ईरान के शीर्ष नेतृत्व को भी नुकसान पहुंचा है, जबकि ईरान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की गई है। इस घटनाक्रम ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर बना दिया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय शांति की अपील कर रहा है।

भारत ने इस पूरे संकट में संतुलित रुख अपनाया है। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में साफ कहा कि भारत शांति, सुरक्षा और स्थिरता का समर्थन करता है। भारत का जोर संवाद और कूटनीतिक समाधान पर है, ताकि क्षेत्र में और अधिक मानवीय संकट न पैदा हो।

CCS की हाई-लेवल बैठक और भारत की तैयारी
पश्चिम एशिया में गंभीर तनाव को देखते हुए रविवार को ही प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की हाई-लेवल बैठक आयोजित की गई। करीब तीन घंटे चली इस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री समेत शीर्ष अधिकारी शामिल हुए।

बैठक में ईरान-इजरायल संघर्ष के भारत पर संभावित प्रभावों की विस्तार से समीक्षा की गई। खास तौर पर पश्चिम एशिया में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार, यदि स्थिति और बिगड़ती है तो भारतीयों को सुरक्षित निकालने और आपातकालीन व्यवस्थाओं को सक्रिय करने की रणनीति पर भी विचार किया गया।

भारत के लिए पश्चिम एशिया रणनीतिक, आर्थिक और प्रवासी भारतीयों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक यूएई समेत अन्य खाड़ी देशों में काम करते हैं। ऐसे में वहां की सुरक्षा स्थिति भारत के लिए प्राथमिक चिंता का विषय है।

कुल मिलाकर, मौजूदा संकट के बीच भारत ने एक जिम्मेदार और संतुलित वैश्विक शक्ति की तरह सक्रिय कूटनीतिक पहल की है। सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट है—तनाव कम हो, नागरिक सुरक्षित रहें और क्षेत्र में जल्द शांति बहाल हो।