डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल की सख्ती: गोला कॉरिडोर में देरी पर 3.35 करोड़ की पेनल्टी तय

Fri 09-Jan-2026,11:08 PM IST +05:30

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डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल की सख्ती: गोला कॉरिडोर में देरी पर 3.35 करोड़ की पेनल्टी तय Durga-Shakti-Nagpal
  • गोला कॉरिडोर में धीमी प्रगति पर प्रशासन सख्त.

  • 3 ठेकेदारों पर 3.35 करोड़ रुपये की पेनल्टी.

  • भुगतान से पहले जुर्माना काटने का निर्देश.

Uttar Pradesh / Lakhimpur :

Lakhimpur / लखीमपुर-खीरी जिले में गोला गोकर्णनाथ स्थित प्राचीन शिव मंदिर को पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना पर अब प्रशासन की सख्ती साफ दिखाई देने लगी है। गोला कॉरिडोर परियोजना में निर्माण कार्य की धीमी प्रगति को लेकर जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल ने कड़ा रुख अपनाया है। लगातार निरीक्षण, जांच समिति की रिपोर्ट और तकनीकी परीक्षण के बाद तीन ठेकेदारों पर कुल 3.35 करोड़ रुपये का लिक्विडेटेड डैमेज लगाने की तैयारी पूरी कर ली गई है।

गुरुवार को हुई स्थलीय जांच में एसडीएम गोला समेत अन्य अधिकारियों ने पाया कि निर्माण स्थल पर न तो पर्याप्त संख्या में श्रमिक मौजूद हैं और न ही काम की गति संतोषजनक है। यूपी प्रोजेक्ट्स कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) यूनिट-14, लखनऊ द्वारा कराए जा रहे इस कार्य की अनुबंधित पूर्णता तिथि 15 मार्च 2026 तय है, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए समय पर परियोजना के पूरा होने पर सवाल खड़े हो गए हैं।

जांच में यह भी सामने आया कि कई चरणों में कार्य निर्धारित समयसीमा से काफी पीछे चल रहा है। ठेकेदारों को पहले भी मौखिक और लिखित रूप से गति बढ़ाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ। इसी लापरवाही को गंभीर मानते हुए डीएम ने भुगतान से पहले ही जुर्माने की कटौती करने का फैसला लिया है।

डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल ने इस संबंध में प्रमुख सचिव पर्यटन को पत्र लिखकर पूरी स्थिति से अवगत कराया है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाली परियोजनाओं में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी संकेत दिए हैं कि भविष्य में यदि कार्य में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ, तो और सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।

प्रशासन का मानना है कि गोला कॉरिडोर न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से बल्कि पर्यटन और स्थानीय रोजगार के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में समय पर और गुणवत्तापूर्ण निर्माण सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। डीएम की इस सख्ती को अब ठेकेदारों के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है कि सुस्ती की कीमत चुकानी ही पड़ेगी।