भारत पर्व-2026 में फ्रांसीसी अतिथि ने झारखंडी संस्कृति और व्यंजनों की सराहना की
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मिलेट संवर्धन और पारंपरिक पाक कला के जरिए झारखंड ने भारत पर्व में सांस्कृतिक कूटनीति को नई मजबूती दी।
आईएचएम रांची के छात्रों द्वारा प्रस्तुत धुस्का और आलू चना ने झारखंडी खानपान की सादगी और पोषण मूल्य को उजागर किया।
Delhi/ लाल किले के लॉन और ज्ञान पथ पर आयोजित भारत पर्व-2026 में झारखंड पर्यटन के तत्वावधान में राज्य की सांस्कृतिक पहचान को प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शित किया गया। फ्रांस से आए एक आगंतुक ने यहां झारखंड की पारंपरिक जीवनशैली, लोक परंपराओं और खास तौर पर क्षेत्रीय व्यंजनों का अनुभव किया। यह अनुभव उनके लिए न केवल नया बल्कि बेहद यादगार भी रहा।
इस अवसर पर फ्रांसीसी अतिथि ने रांची स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट (आईएचएम) के छात्रों से संवाद किया, जिन्होंने पाक कला प्रदर्शनी के अंतर्गत प्रामाणिक झारखंडी व्यंजन प्रस्तुत किए। छात्रों द्वारा बनाए गए पारंपरिक व्यंजन धुस्का और आलू चना ने अतिथि को विशेष रूप से प्रभावित किया। इन व्यंजनों को शेफ हरे कृष्ण चौधरी के मार्गदर्शन में पारंपरिक विधियों और स्थानीय सामग्रियों से तैयार किया गया था।
अतिथि ने व्यंजनों के स्वाद, सादगी और पोषण मूल्य की सराहना करते हुए कहा कि झारखंडी भोजन स्थानीय संस्कृति और सतत खाद्य परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने माना कि ऐसे पारंपरिक व्यंजन किसी भी क्षेत्र की आत्मा को दर्शाते हैं।
शेफ हरे कृष्ण चौधरी ने इस दौरान झारखंडी व्यंजनों की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि, पोषण संबंधी महत्व और पारंपरिक पकाने की विधियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि स्थानीय अनाज, मिलेट्स और प्राकृतिक सामग्री झारखंडी खानपान की पहचान हैं। साथ ही उन्होंने पर्यटन मंत्रालय की भूमिका की सराहना की, जो भारत पर्व जैसे मंचों के माध्यम से राज्यों की सांस्कृतिक और पाक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने में सहायक है।
संस्थागत योगदान पर बात करते हुए शेफ चौधरी ने आईएचएम रांची के प्रिंसिपल डॉ. भूपेश कुमार के नेतृत्व की प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि डॉ. कुमार के मार्गदर्शन में आईएचएम रांची ने मिलेट संवर्धन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है और मिलेट पर राष्ट्रीय मिशन के अनुरूप इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में स्थान प्राप्त किया है।
यह पूरा अनुभव इस बात का प्रमाण बना कि पाक विरासत सांस्कृतिक कूटनीति का एक सशक्त माध्यम है। अंतरराष्ट्रीय आगंतुक की सराहना ने यह स्पष्ट किया कि भारत पर्व जैसे आयोजनों के जरिए क्षेत्रीय भारतीय संस्कृतियों और व्यंजनों को वैश्विक मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सकता है।