मंगोलिया से भारत लौटे भगवान बुद्ध के प्रमुख शिष्यों के पवित्र अवशेष, 10 दिन में 1 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

Wed 10-Jun-2026,08:40 PM IST +05:30

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मंगोलिया से भारत लौटे भगवान बुद्ध के प्रमुख शिष्यों के पवित्र अवशेष, 10 दिन में 1 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन Mongolia Exhibition
  • बुद्ध के प्रमुख शिष्यों के पवित्र अवशेष मंगोलिया से भारत लौटे।

  • 10 दिनों में लगभग 1 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन।

  • भारत-मंगोलिया के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंध हुए मजबूत।

Delhi / Delhi :

Delhi / भगवान बुद्ध के दो प्रमुख शिष्यों अर्हंत सारिपुत्र और अर्हंत मौद्गल्यायन के पवित्र अवशेष दस दिवसीय सफल प्रदर्शनी के बाद मंगोलिया से भारत वापस लौट आए हैं। इन अवशेषों को मंगोलिया की राजधानी उलानबातर स्थित गंडन तेगचेनलिंग मठ में 31 मई से 9 जून 2026 तक आम जनता के दर्शन के लिए प्रदर्शित किया गया था। इस दौरान मंगोलिया के विभिन्न हिस्सों से लगभग एक लाख श्रद्धालु और बौद्ध अनुयायी इन दुर्लभ अवशेषों के दर्शन करने पहुंचे।

यह प्रदर्शनी भारत और मंगोलिया के बीच गहरे आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंधों का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बनकर सामने आई। प्रदर्शनी का आयोजन भारत के संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय संग्रहालय ने मध्य प्रदेश सरकार, श्रीलंका की महाबोधि सोसाइटी और इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉन्फेडरेशन (IBC) के सहयोग से किया था। विशेष बात यह रही कि प्रदर्शनी का उद्घाटन मंगोलिया की बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर किया गया, जिससे श्रद्धालुओं में उत्साह और श्रद्धा का विशेष माहौल देखने को मिला।

पवित्र अवशेषों को 30 मई को भारतीय वायु सेना के विशेष विमान से मंगोलिया पहुंचाया गया था। असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने इन अवशेषों को मंगोलिया के शिक्षा मंत्री एनख-अमगलान और गंडन तेगचेनलिंग मठ के प्रमुख खंबा नोमुन खान गेशे लहारम्पा डी. जावज़ांदोरज को औपचारिक रूप से सौंपा था।

यह प्रदर्शनी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अक्टूबर 2025 में मंगोलिया के राष्ट्रपति खुरेलसुख उखना की भारत यात्रा के दौरान की गई घोषणा का परिणाम थी। भारत और मंगोलिया के बीच बौद्ध धर्म सदियों से सांस्कृतिक और आध्यात्मिक सेतु का कार्य करता रहा है। ऐसे में इस आयोजन ने दोनों देशों के लोगों को एक-दूसरे के और करीब लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रदर्शनी के दौरान बौद्ध धर्म के इतिहास, दर्शन और उसके वैश्विक प्रसार पर आधारित कई विशेष प्रदर्शनियां भी आयोजित की गईं। इनमें अर्हंत सारिपुत्र और मौद्गल्यायन के जीवन, बुद्ध धम्म के मंगोलिया तक पहुंचने की यात्रा तथा भारत के संग्रहालयों में संरक्षित बौद्ध धरोहरों को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया। इन प्रदर्शनियों को विद्वानों, भिक्षुओं और आम श्रद्धालुओं से व्यापक सराहना मिली।

पवित्र अवशेषों को विशेष प्रोटोकॉल के तहत राष्ट्राध्यक्ष के समान सम्मान और सुरक्षा प्रदान की गई। भारत वापसी के दौरान लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल इन्हें विशेष विमान से लेकर आया। समापन समारोह में मंगोलिया और भारत के कई वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर मंगोलिया की ओर से भारत को एक पौधा भी भेंट किया गया, जिसे दोनों देशों की मित्रता और आध्यात्मिक संबंधों के प्रतीक के रूप में लद्दाख में लगाया जाएगा। यह आयोजन भारत और मंगोलिया के सदियों पुराने सांस्कृतिक एवं धार्मिक रिश्तों को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।