ट्राई-सिटी में कैब हड़ताल से बढ़ी परेशानी, 50 हजार से अधिक यात्री प्रभावित; जानिए क्या हैं ड्राइवरों की प्रमुख मांगें

Tue 09-Jun-2026,05:05 PM IST +05:30

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ट्राई-सिटी में कैब हड़ताल से बढ़ी परेशानी, 50 हजार से अधिक यात्री प्रभावित; जानिए क्या हैं ड्राइवरों की प्रमुख मांगें Chandigarh Cab Strike
  • ट्राई-सिटी में कैब चालकों की हड़ताल से 50 हजार से अधिक यात्री प्रभावित।

  • ड्राइवरों की मांग, किराया 25 से बढ़ाकर 35 रुपये प्रति किलोमीटर किया जाए।

  • एग्रीगेटर पॉलिसी 2025 लागू करने और कंपनियों के कमीशन पर रोक की मांग।

Chandigarh / Chandigarh :

Chandigarh / चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला की ट्राई-सिटी में रोजाना सफर करने वाले 50 हजार से अधिक लोगों के लिए अगले कुछ दिन मुश्किल भरे रहने वाले हैं। ओला, उबर और इनड्राइव जैसी ऐप आधारित कैब सेवाओं से जुड़े ड्राइवरों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है। सेक्टर-25 स्थित रैली ग्राउंड में एकत्रित हुए चालक 16 जून तक रोजाना सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक सवारियां नहीं उठाएंगे। इस फैसले का सीधा असर नौकरीपेशा लोगों, छात्रों, मरीजों और आम यात्रियों पर पड़ रहा है, जिन्हें अब वैकल्पिक साधनों पर निर्भर होना पड़ रहा है।

इस आंदोलन की सबसे बड़ी वजह चंडीगढ़ प्रशासन की एग्रीगेटर पॉलिसी 2025 को बताया जा रहा है। यह नीति ऐप आधारित कैब सेवाओं को नियंत्रित करने, यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ड्राइवरों के हितों की रक्षा के उद्देश्य से तैयार की गई थी। नीति में कंपनियों द्वारा लिए जाने वाले कमीशन की सीमा तय करने और किराया प्रणाली को पारदर्शी बनाने जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं। हालांकि, कैब चालकों का आरोप है कि नीति बने एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद इसे प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया गया है। उनका कहना है कि इसका लाभ कंपनियों को मिल रहा है, जबकि आर्थिक नुकसान ड्राइवरों को झेलना पड़ रहा है।

ड्राइवरों की दूसरी प्रमुख मांग किराए में बढ़ोतरी से जुड़ी है। वर्तमान में चंडीगढ़ प्रशासन ने कैब का बेस किराया 25 रुपये प्रति किलोमीटर निर्धारित किया हुआ है। लेकिन चालकों का कहना है कि बढ़ती महंगाई, सीएनजी, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि, वाहन की ईएमआई, बीमा, सर्विसिंग, टोल टैक्स और परमिट शुल्क जैसे खर्चों के कारण यह किराया अब पर्याप्त नहीं रह गया है। उनका तर्क है कि कई बार उन्हें खाली वाहन लेकर लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे आय और भी कम हो जाती है। इसी कारण वे किराया बढ़ाकर 35 रुपये प्रति किलोमीटर करने की मांग कर रहे हैं।

कैब चालकों का आरोप है कि एग्रीगेटर कंपनियां सॉफ्टवेयर शुल्क और अन्य छिपे हुए चार्ज के नाम पर 30 से 40 प्रतिशत तक कमीशन वसूल रही हैं। इसके अलावा इंसेंटिव आधारित व्यवस्था के कारण ड्राइवरों पर लंबे समय तक वाहन चलाने का दबाव बनता है। कई चालक प्रतिदिन 14 से 16 घंटे तक काम करने को मजबूर हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।

आंदोलन का एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा अवैध बाइक टैक्सी और निजी वाहनों के व्यावसायिक उपयोग पर रोक लगाने की मांग है। ड्राइवरों का कहना है कि वे कमर्शियल परमिट और अन्य शुल्कों का भुगतान करते हैं, जबकि कई निजी वाहन बिना आवश्यक नियमों का पालन किए व्यावसायिक सेवाएं दे रहे हैं। इससे उन्हें असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।

कैब सेवाएं प्रभावित होने के बाद अब बड़ी संख्या में लोग चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग (CTU) की बसों और ऑटो-रिक्शा का सहारा ले रहे हैं। हालांकि, कई क्षेत्रों में बस सेवाओं की सीमित पहुंच के कारण यात्रियों को ऑटो चालकों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। ऐसे में मनमाने किराए की शिकायतें भी सामने आने लगी हैं। रेलवे स्टेशन, बस अड्डों, पीजीआई और जीएमसीएच-32 जैसे अस्पतालों में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

फिलहाल सभी की नजरें चंडीगढ़ प्रशासन और परिवहन विभाग पर टिकी हैं। यदि समय रहते कोई समाधान नहीं निकाला गया, तो ट्राई-सिटी की परिवहन व्यवस्था पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है। वहीं यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे कारपूलिंग का उपयोग करें, यात्रा की योजना पहले से बनाएं और ऑटो में बैठने से पहले किराया तय कर लें, ताकि अनावश्यक परेशानी से बचा जा सके।