हरिद्वार में भारतीय फार्माकोपिया 2026 सम्मेलन, दवा गुणवत्ता और अनुपालन को मजबूत बनाने पर जोर
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Indian Pharmacopoeia 2026
भारतीय फार्माकोपिया 2026 के नए प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा।
दवा गुणवत्ता और नियामक अनुपालन को मजबूत बनाने पर जोर।
उद्योग, वैज्ञानिकों और नियामक संस्थाओं ने साझा किया अनुभव।
Haridwar / भारत में दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से भारतीय भेषज संहिता आयोग (IPC) ने हरिद्वार में भारतीय फार्माकोपिया (IP) 2026 पर एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक सम्मेलन और संवादात्मक सत्र का आयोजन किया। यह कार्यक्रम देवभूमि फार्मा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (ADPI) और उत्तराखंड के विभिन्न फार्मास्युटिकल विनिर्माण संगठनों के सहयोग से आयोजित किया गया। सम्मेलन का मुख्य विषय था – “फार्माकोपिया मानकों और गुणवत्ता अनुपालन के माध्यम से फार्मास्युटिकल विनिर्माण को सुदृढ़ बनाना”।
उत्तराखंड देश के प्रमुख दवा विनिर्माण केंद्रों में से एक है और यहां बड़ी संख्या में फार्मा कंपनियां कार्यरत हैं। इसी कारण इस सम्मेलन को राज्य में आयोजित करने का उद्देश्य उद्योग जगत को भारतीय फार्माकोपिया 2026 के नए प्रावधानों से अवगत कराना और गुणवत्ता मानकों के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। कार्यक्रम में दवा उद्योग, गुणवत्ता नियंत्रण, गुणवत्ता आश्वासन, नियामक संस्थाओं और प्रयोगशालाओं से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया।
सम्मेलन की शुरुआत देवभूमि फार्मा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप जैन के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने कहा कि फार्मास्युटिकल क्षेत्र में गुणवत्ता बनाए रखने के लिए उद्योग और मानक निर्धारण संस्थाओं के बीच मजबूत सहयोग बेहद जरूरी है। इसके बाद केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) के सहायक औषधि नियंत्रक सिद्धार्थ सहाय मल्होत्रा और उत्तराखंड के औषधि नियंत्रक ताजबेर सिंह ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और जनस्वास्थ्य की रक्षा में फार्माकोपिया मानकों की अहम भूमिका पर प्रकाश डाला।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित आईपीसी के सचिव एवं वैज्ञानिक निदेशक डॉ. वी. कलैसेल्वन ने भारतीय फार्माकोपिया को देश की दवा गुणवत्ता प्रणाली की रीढ़ बताया। उन्होंने कहा कि भारत आज वैश्विक स्तर पर फार्मास्युटिकल क्षेत्र में एक मजबूत पहचान बना चुका है और इस प्रतिष्ठा को बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित गुणवत्ता मानकों का पालन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने भारतीय फार्माकोपिया 2026 में शामिल नई प्रगतियों और सुधारों की जानकारी भी साझा की।
सम्मेलन के दौरान कई तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें फार्माकोपियल मानकों, संदर्भ पदार्थों, सूक्ष्मजीव गुणवत्ता आवश्यकताओं, गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली, विश्लेषणात्मक परीक्षण और जैविक मानकों से जुड़े नवीनतम विकासों पर विस्तार से चर्चा हुई। इन सत्रों ने उद्योग जगत को यह समझने में मदद की कि नई आवश्यकताओं को उत्पादन और गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रियाओं में प्रभावी रूप से कैसे लागू किया जाए।
एक विशेष संवादात्मक सत्र में प्रतिभागियों को आईपीसी के वैज्ञानिकों से सीधे बातचीत करने और तकनीकी तथा नियामक मुद्दों पर अपने प्रश्नों के उत्तर प्राप्त करने का अवसर मिला। इससे उद्योग जगत की उन चुनौतियों को समझने में भी मदद मिली, जिनका सामना उन्हें नए मानकों को लागू करते समय करना पड़ता है।
कार्यक्रम के अंत में भारतीय भेषज संहिता आयोग ने दवा गुणवत्ता को बेहतर बनाने और उद्योग के साथ निरंतर सहयोग बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। सम्मेलन ने यह संदेश दिया कि उच्च गुणवत्ता वाली और सुरक्षित दवाओं का निर्माण केवल नियामकीय आवश्यकता नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य के प्रति उद्योग की जिम्मेदारी भी है। यह पहल भारत को वैश्विक फार्मास्युटिकल बाजार में और अधिक विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।