डॉ. जितेंद्र सिंह ने उद्योग जगत से कहा- भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ाएं निवेश, बनें वैश्विक स्पेस पावर

Thu 11-Jun-2026,11:33 PM IST +05:30

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डॉ. जितेंद्र सिंह ने उद्योग जगत से कहा- भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ाएं निवेश, बनें वैश्विक स्पेस पावर Private Space Companies
  • डॉ. जितेंद्र सिंह ने अंतरिक्ष क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की अपील की।

  • भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 और IN-SPACe को बताया बड़ा सुधार।

  • 400 से अधिक स्पेस स्टार्ट-अप भारत की नई ताकत बनकर उभरे।

Delhi / Delhi :

Delhi / केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए उद्योग जगत से अधिक निवेश और सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया है। 10वें आईएन-एसपीएसीई उद्योग संपर्क कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के पास प्रतिभा, नवाचार और तकनीकी क्षमता की कोई कमी नहीं है, लेकिन वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में अग्रणी स्थान हासिल करने के लिए बड़े उद्योगों की मजबूत भागीदारी आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलना एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी निर्णय था। इस कदम ने भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार किया और निजी कंपनियों तथा स्टार्ट-अप्स के लिए अवसरों के द्वार खोल दिए। आज भारत का अंतरिक्ष इकोसिस्टम तेजी से विकसित हो रहा है और दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।

डॉ. सिंह ने बताया कि अंतरिक्ष सुधारों के बाद लागू की गई भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 ने इस क्षेत्र को स्पष्ट दिशा और मजबूत नियामक ढांचा प्रदान किया है। इसके साथ ही प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नियमों में ढील दिए जाने से विदेशी निवेश आकर्षित करने और भारत को वैश्विक अंतरिक्ष मूल्य श्रृंखला से जोड़ने में मदद मिली है।

उन्होंने कहा कि आईएन-एसपीएसीई (IN-SPACe) की स्थापना एक महत्वपूर्ण संस्थागत सुधार है, जिसने गैर-सरकारी संस्थाओं को अंतरिक्ष गतिविधियों में भागीदारी का अवसर प्रदान किया है। यह संस्था निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित करने, मार्गदर्शन देने और आवश्यक अनुमतियां उपलब्ध कराने का काम कर रही है।

सरकार द्वारा नवाचार को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए डॉ. सिंह ने बताया कि 1,000 करोड़ रुपये का वेंचर कैपिटल फंड और 500 करोड़ रुपये का टेक्नोलॉजी एडॉप्शन फंड शुरू किया गया है। इसके अलावा स्टार्ट-अप्स को बीज वित्तपोषण, इन्क्यूबेशन सहायता और कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से समर्थन दिया जा रहा है। एआईसीटीई द्वारा स्वीकृत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी पाठ्यक्रम भी भविष्य के विशेषज्ञों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि भारत का निजी अंतरिक्ष इकोसिस्टम अब 400 से अधिक स्टार्ट-अप्स तक पहुंच चुका है। स्काईरूट एयरोस्पेस, अग्निकुल कॉसमॉस, पिक्सेल, दिगंतारा और ध्रुव स्पेस जैसी कंपनियां वैश्विक स्तर पर भारतीय नवाचार और तकनीकी क्षमता का परिचय दे रही हैं। ये कंपनियां उपग्रह, प्रक्षेपण वाहन, पृथ्वी अवलोकन तकनीक और अंतरिक्ष सुरक्षा से जुड़े समाधान विकसित कर रही हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने उद्योग जगत से अपनी चुनौतियों और समस्याओं को खुलकर सामने रखने की अपील की। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार तेज मंजूरी प्रक्रिया, सरल नियमों और प्रभावी सिंगल-विंडो सिस्टम के माध्यम से उद्योगों को हर संभव सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि शासन का उद्देश्य नवाचार को प्रोत्साहित करना होना चाहिए, न कि अनावश्यक बाधाएं उत्पन्न करना।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाएं केवल सरकारी प्रयासों से पूरी नहीं हो सकतीं। इसके लिए सरकार, उद्योग, निवेशक, शिक्षण संस्थान और राज्य सरकारों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि सही नीतियों, मजबूत साझेदारी और नवाचार के बल पर भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में एक अग्रणी शक्ति बनकर उभरेगा।