डोंगरगढ़ डाकघर घोटाला: डुप्लीकेट पासबुक से करोड़ों की कथित निकासी
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डोंगरगढ़ के जटकन्हार डाकघर में डुप्लीकेट पासबुक बनाकर खातों से कथित अवैध निकासी का आरोप, सैकड़ों खाताधारकों की जमा राशि पर संकट।
डाक विभाग के अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और पीड़ितों की रकम लौटाने का आश्वासन दिया, लेकिन गिरफ्तारी का इंतजार जारी।
Dongargarh/ छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ ब्लॉक के ग्राम जटकन्हार स्थित डाकघर में करोड़ों रुपये के कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि खाताधारकों की जानकारी के बिना उनके खातों से रकम निकाली गई और डुप्लीकेट पासबुक तैयार कर धोखाधड़ी की गई। घटना के उजागर होते ही आरोपी पोस्ट मास्टर के फरार होने की चर्चा है, जिससे लोगों में असुरक्षा और गुस्सा बढ़ गया है।
ग्रामीणों के अनुसार यह डाकघर India Post के अधीन संचालित होता है। कई हितग्राही जब अपनी जमा राशि निकालने पहुंचे तो उनके खातों में शून्य या बेहद कम शेष राशि दिखाई दी। पासबुक मिलान और रिकॉर्ड जांच में डुप्लीकेट पासबुक बनाए जाने का संदेह सामने आया। इससे गांवों में हड़कंप मच गया और सैकड़ों खाताधारकों की जमा पूंजी पर संकट गहरा गया।
पीड़ितों का कहना है कि वे कई दिनों से पोस्ट ऑफिस और थाने के चक्कर लगा रहे थे, लेकिन विभागीय और पुलिस स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे नाराज होकर करीब आठ गांवों के ग्रामीण बड़ी संख्या में डोंगरगढ़ पोस्ट ऑफिस पहुंचे। उन्होंने घेराव किया और मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया, जिससे घंटों तक आवागमन बाधित रहा।
स्थिति तब और संवेदनशील हो गई जब स्थानीय विधायक हर्षिता स्वामी बघेल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ मौके पर पहुंचीं। उन्होंने ग्रामीणों के समर्थन में धरना दिया और निष्पक्ष जांच की मांग की। उनके हस्तक्षेप के बाद प्रशासन और डाक विभाग के अधिकारी सक्रिय हुए।
सुपरिटेंडेंट ऑफ पोस्ट ऑफिस महेंद्र शर्मा सहित जिला स्तरीय अधिकारी मौके पर पहुंचे और पूरे मामले की जांच कर दोषियों पर सख्त विभागीय कार्रवाई का आश्वासन दिया। साथ ही पीड़ितों की राशि लौटाने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई। आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने चक्काजाम समाप्त किया, लेकिन क्षेत्र में अब भी असंतोष बना हुआ है।
करोड़ों रुपये के इस कथित घोटाले ने डाक विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब लोगों की निगाहें जांच की निष्पक्षता, आरोपी की गिरफ्तारी और पीड़ितों को उनकी जमा राशि की वापसी पर टिकी हैं।