अमित शाह ने आदि शंकराचार्य को नमन, अद्वैत दर्शन पर दिया जोर
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अमित शाह ने आदि शंकराचार्य की जयंती पर अद्वैत वेदांत के महत्व को बताते हुए समाज में एकता, आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का संदेश दिया।
गृह मंत्री ने कहा कि शंकराचार्य ने कठिन समय में भारत को एक सूत्र में बांधते हुए चार मठों की स्थापना कर सनातन धर्म को मजबूत किया।
उनके सरल भाष्यों और दर्शन ने आम लोगों को वैदिक ज्ञान से जोड़कर भारतीय संस्कृति को पुनर्जीवित करने में अहम भूमिका निभाई।
नई दिल्ली/ केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री Amit Shah ने जगद्गुरु Adi Shankaracharya की जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी अपने संदेश में उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य सनातन संस्कृति के प्राणाधार हैं और उनका अद्वैत वेदांत दर्शन आज भी विश्वभर में लोगों का मार्गदर्शन कर रहा है।
अमित शाह ने अपने संदेश में उल्लेख किया कि जब भारत सामाजिक रूढ़ियों और सांस्कृतिक चुनौतियों से घिरा हुआ था, तब आदि शंकराचार्य ने सत्य के मार्ग को पुनर्स्थापित किया। उन्होंने अद्वैत वेदांत के माध्यम से समाज को एकात्मता और आध्यात्मिक जागरूकता का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य ने देशभर में भ्रमण कर चारों दिशाओं में चार प्रमुख मठों की स्थापना की, जिससे सनातन धर्म की पुनर्स्थापना और संरक्षण सुनिश्चित हुआ। उनके द्वारा उपनिषदों और वेदों पर किए गए सरल एवं स्पष्ट भाष्य ने आम लोगों को वैदिक ज्ञान से जोड़ने का कार्य किया।
गृह मंत्री ने यह भी कहा कि आदि शंकराचार्य का जीवन अल्पकालिक होने के बावजूद अत्यंत प्रभावशाली रहा। उन्होंने अपनी विद्वता और तपस्या के माध्यम से भारतीय संस्कृति को नई ऊर्जा प्रदान की।
अमित शाह ने देशवासियों से अपील की कि वे आदि शंकराचार्य के विचारों को आत्मसात करें और सत्य, एकता तथा सांस्कृतिक मूल्यों को जीवन में अपनाएं। उन्होंने कहा कि उनका दर्शन आज भी समाज को दिशा देने में सक्षम है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।