Glasgow Commonwealth Games: Boxing में भारत का ऐतिहासिक प्रदर्शन, रिकॉर्ड 7 Gold Medal

Sun 02-Aug-2026,12:38 PM IST +05:30

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Glasgow Commonwealth Games: Boxing में भारत का ऐतिहासिक प्रदर्शन, रिकॉर्ड 7 Gold Medal Glasgow Commonwealth Games
  • भारत ने मुक्केबाजी में रिकॉर्ड 7 स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा।

  • महिला बॉक्सरों ने पांच गोल्ड जीतकर शानदार दबदबा कायम रखा।

  • सचिन सिवाच और अंकुश पंघाल ने पुरुष वर्ग में स्वर्ण पदक जीते।

Delhi / Delhi :

New Delhi / ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय मुक्केबाजी दल ने इतिहास रचते हुए अपने अभियान का शानदार समापन किया। भारतीय मुक्केबाजों ने कुल 7 स्वर्ण, 3 रजत पदक जीतकर कॉमनवेल्थ गेम्स के मुक्केबाजी इतिहास में भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज कराया। महिला मुक्केबाजों ने उम्मीदों पर पूरी तरह खरा उतरते हुए पांच स्वर्ण पदक अपने नाम किए, जबकि पुरुष वर्ग में सचिन सिवाच और अंकुश पंघाल ने स्वर्ण जीतकर भारत की उपलब्धियों में चार चांद लगा दिए।

भारतीय महिला टीम की अगुवाई मौजूदा विश्व चैंपियन जैसमीन लंबोरिया (57 किग्रा) ने की। उन्होंने फाइनल में उत्तरी आयरलैंड की पूर्व चैंपियन माइकेला वॉल्श को 5-0 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। प्रीति पवार (54 किग्रा) ने कनाडा की स्कारलेट डेलगाडो को एकतरफा मुकाबले में 5-0 से हराकर भारत को दिन का पहला स्वर्ण दिलाया। साक्षी चौधरी (51 किग्रा) ने इंग्लैंड की रूबी वाइट को 5-0 से मात दी, जबकि अरूंधति चौधरी (70 किग्रा) ने इंग्लैंड की शेंटेले रीड को 5-0 से हराकर स्वर्ण अपने नाम किया। प्रिया घंघास (60 किग्रा) ने कनाडा की मैरी बाथोल अल अहमदिएह को 4-1 के विभाजित फैसले से हराकर भारत के लिए एक और स्वर्ण पदक सुनिश्चित किया।

पुरुष वर्ग में सचिन सिवाच (60 किग्रा) ने रोमांचक मुकाबले में नामीबिया के ट्रायागेन मॉर्निंग एनडेवेलो को 3-2 के विभाजित फैसले से हराकर स्वर्ण पदक जीता। शुरुआती दो राउंड में पिछड़ने के बावजूद सचिन ने तीसरे राउंड में शानदार वापसी करते हुए प्रतिद्वंद्वी को 'स्टैंडिंग काउंट' के लिए मजबूर किया और मुकाबला अपने नाम किया।

भारत का सातवां स्वर्ण अंकुश पंघाल (80 किग्रा) ने दिलाया। उन्होंने इंग्लैंड के दिमेजी शिट्टू को 4-1 के विभाजित फैसले से हराकर स्वर्ण पदक जीता। एसएसी एरेना में भारतीय दर्शकों के "भारत माता की जय" और "इंडिया-इंडिया" के नारों के बीच खिलाड़ियों को घरेलू मैदान जैसा माहौल मिला, जिसने उनके प्रदर्शन में अतिरिक्त ऊर्जा भर दी।

हालांकि सभी मुकाबले भारत के पक्ष में नहीं रहे। ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन को फाइनल में ऑस्ट्रेलिया की एम्मा सू ग्रीनट्री के खिलाफ 4-1 के विभाजित फैसले से हार का सामना करना पड़ा और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा। वहीं जादूमणि सिंह (55 किग्रा) ऑस्ट्रेलिया के जाई डिक्सन से हारकर रजत पदक जीत सके। पुरुषों के 90+ किग्रा वर्ग में नरेंदर बेरवाल को इंग्लैंड के डामार थॉमस के खिलाफ हार मिली और उन्हें भी रजत पदक मिला।

भारत का यह प्रदर्शन इसलिए भी ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि इससे पहले गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 में भारतीय मुक्केबाजों ने तीन स्वर्ण सहित कुल सात पदक जीते थे। इस बार सात स्वर्ण पदकों के साथ भारतीय टीम ने नया रिकॉर्ड कायम किया और यह साबित कर दिया कि भारतीय मुक्केबाजी विश्व स्तर पर लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है।