आर्थिक समीक्षा 2025-26: ग्रामीण महंगाई घटी
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राज्यवार महंगाई में स्थानीय कारकों की बड़ी भूमिका, दक्षिण और उत्तर-पूर्वी राज्यों में अधिक उतार-चढ़ाव
आर्थिक समीक्षा 2025-26 में खाद्य मुद्रास्फीति नियंत्रण को मूल्य स्थिरता की प्रमुख वजह बताया गया
Delhi/ केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में आर्थिक समीक्षा 2025-26 पेश करते हुए देश में महंगाई के बदलते रुझानों की अहम तस्वीर रखी। समीक्षा के अनुसार, वर्ष 2025 में ग्रामीण मुद्रास्फीति में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है और यह शहरी महंगाई से नीचे बनी रही। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोक्ताओं पर पड़ने वाला दबाव कम हुआ है, जो पिछले दो वर्षों की तुलना में एक सकारात्मक बदलाव माना जा रहा है।
आर्थिक समीक्षा में बताया गया कि 2023 और 2024 के दौरान ग्रामीण मुद्रास्फीति लगातार शहरी महंगाई से अधिक रही थी। इसका प्रमुख कारण ग्रामीण खपत में खाद्य पदार्थों की अधिक हिस्सेदारी थी, जिससे खाद्य कीमतों में उतार-चढ़ाव का प्रभाव ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा दिखता था। हालांकि 2025 में जैसे ही खाद्य मुद्रास्फीति में नरमी आई, ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में महंगाई दर घटी, लेकिन इसका असर ग्रामीण क्षेत्रों में अपेक्षाकृत अधिक सकारात्मक रहा।
राज्यवार आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025-26 के दौरान केरल और लक्षद्वीप में खुदरा मुद्रास्फीति भारतीय रिज़र्व बैंक के ऊपरी सहनशीलता स्तर 6 प्रतिशत तक पहुंच गई। इसके विपरीत, अधिकांश राज्यों में औसत महंगाई दर 2 से 6 प्रतिशत के दायरे में या उससे नीचे बनी रही, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर मूल्य स्थिरता को मजबूती मिली।
आर्थिक समीक्षा में यह भी रेखांकित किया गया कि राज्यों में मुद्रास्फीति का स्वरूप राष्ट्रीय औसत से भिन्न रहता है और इसमें स्थानीय कारकों की बड़ी भूमिका होती है। जनवरी 2014 से दिसंबर 2025 तक के मासिक राज्यवार सीपीआई आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि कुछ राज्यों में लगातार ऊंची या कम महंगाई देखी गई। यह अंतर केवल अस्थायी नहीं है, बल्कि कई राज्यों में यह प्रवृत्ति लंबे समय तक बनी रहती है।
सर्वेक्षण के मुताबिक, दक्षिण और उत्तर-पूर्व के कुछ दूरस्थ राज्यों में राष्ट्रीय औसत से अधिक मुद्रास्फीति दर्ज की गई, जबकि दिल्ली और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में महंगाई राष्ट्रीय औसत से कम रही। यह दर्शाता है कि क्षेत्रीय आपूर्ति श्रृंखला, परिवहन लागत और उपभोग पैटर्न राज्यों की महंगाई दर को प्रभावित करते हैं।
आर्थिक समीक्षा में यह भी सामने आया कि दीर्घकाल में राज्यों की औसत मुद्रास्फीति पारिश्रमिक दर राष्ट्रीय स्तर की तुलना में अधिक रही है। आगे के विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ कि राज्य स्तर पर मुद्रास्फीति का सकारात्मक संबंध जीडीपी वृद्धि दर और कोविड-19 के बाद की आर्थिक रिकवरी से है। वहीं, औद्योगिक उत्पादन की अधिक हिस्सेदारी वाले राज्यों में अपेक्षाकृत कम मुद्रास्फीति देखी गई, जो आपूर्ति क्षमता और विनिर्माण दक्षता को दर्शाती है।
रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया कि जीएसटी लागू होने के बाद राज्यों के बीच मुद्रास्फीति अंतर पर कोई प्रत्यक्ष मूल्य प्रभाव नहीं पड़ा। कुल मिलाकर, आर्थिक समीक्षा 2025-26 यह संकेत देती है कि खाद्य कीमतों में नियंत्रण और क्षेत्रीय नीतिगत संतुलन के कारण ग्रामीण-शहरी महंगाई का अंतर कम हुआ है, जो समावेशी आर्थिक स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है।