राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के 31 विधायक हिमाचल शिफ्ट, सीएम सुक्खू से कुफरी में मुलाकात
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Haryana Rajya Sabha Election
राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने 31 विधायकों को हिमाचल शिफ्ट किया.
सीएम सुक्खू ने कुफरी में विधायकों से मिलकर चुनावी रणनीति पर चर्चा की.
क्रॉस वोटिंग रोकने के लिए कसौली के होटलों में ठहराए गए विधायक.
Shimla / हरियाणा में होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इसी कड़ी में कांग्रेस ने अपने 31 विधायकों को हिमाचल प्रदेश के शिमला के पास स्थित कुफरी में ठहराया हुआ था, जहां रविवार को Sukhvinder Singh Sukhu ने उनसे मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने होटल वाइल्ड फ्लावर हाल में विधायकों के साथ दोपहर का भोजन किया और करीब डेढ़ घंटे तक उनसे चर्चा की। इस मुलाकात को राजनीतिक हलकों में “लंच डिप्लोमेसी” के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य विधायकों को एकजुट रखना और आगामी मतदान के लिए रणनीति तैयार करना था।
बताया जा रहा है कि बैठक के दौरान मुख्यमंत्री सुक्खू ने विधायकों के साथ चुनावी रणनीति, संगठन की स्थिति और मतदान की तैयारियों पर विस्तार से बातचीत की। इस दौरान उनके राजनीतिक सलाहकार सुनील कुमार बिट्टू भी मौजूद रहे। कांग्रेस को आशंका है कि राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग का खतरा हो सकता है, इसलिए पार्टी ने अपने विधायकों को एक साथ सुरक्षित स्थान पर रखने की रणनीति अपनाई है।
कांग्रेस के इन विधायकों को पहले कुफरी में रखा गया था, जो शिमला के पास एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। यहां उन्हें पार्टी की एकजुटता और अनुशासन बनाए रखने का संदेश दिया गया। इसके बाद रविवार को सभी विधायकों को सोलन जिले के कसौली स्थित दो निजी होटलों में शिफ्ट कर दिया गया। कसौली चंडीगढ़ से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित है, जिससे सोमवार को मतदान के लिए उन्हें हरियाणा विधानसभा तक ले जाना आसान रहेगा।
जानकारी के मुताबिक राज्यसभा चुनाव के दिन यानी 16 मार्च को सुबह 9 बजे से मतदान शुरू होगा। विधायकों को कसौली से कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच हरियाणा विधानसभा ले जाया जाएगा। पार्टी नेतृत्व यह सुनिश्चित करना चाहता है कि मतदान के समय सभी विधायक एकजुट रहें और किसी भी तरह की राजनीतिक जोड़-तोड़ की संभावना को रोका जा सके।
हरियाणा की 90 सदस्यीय विधानसभा में फिलहाल Bharatiya Janata Party के पास 48 विधायक हैं और तीन निर्दलीय विधायकों का भी उसे समर्थन प्राप्त है। वहीं Indian National Congress के पास कुल 37 विधायक हैं। भाजपा की नजर राज्यसभा की दोनों सीटों पर है, इसलिए चुनाव से पहले सियासी गतिविधियां और रणनीतिक कदम तेज हो गए हैं।
कुल मिलाकर, राज्यसभा चुनाव से पहले दोनों प्रमुख दल अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने और संभावित क्रॉस वोटिंग से बचाने के लिए पूरी तरह सतर्क नजर आ रहे हैं। ऐसे में यह चुनाव केवल एक संसदीय प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति और प्रबंधन की भी परीक्षा बन गया है।