दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति का संदेश: मूल्य, तकनीक और युवा राष्ट्र निर्माण की धुरी

Fri 02-Jan-2026,06:36 PM IST +05:30

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दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति का संदेश: मूल्य, तकनीक और युवा राष्ट्र निर्माण की धुरी Vice-President-Mgr-University-Convocation-2026
  • विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को पाने के लिए कौशल विकास, तकनीकी ज्ञान और आजीवन सीखने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती तकनीकों के युग में नैतिकता, सामाजिक जिम्मेदारी और संतुलित सोच को सफलता की कुंजी बताया।

Tamil Nadu / Chennai :

Chennai/ उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने चेन्नई स्थित डॉ. एम.जी.आर. शैक्षिक एवं अनुसंधान संस्थान के 34वें दीक्षांत समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए विद्यार्थियों से ज्ञान, नैतिकता और राष्ट्र सेवा को जीवन का मूल उद्देश्य बनाने का आह्वान किया। उन्होंने नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह केवल शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में एक नए चरण की शुरुआत है।

अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने तमिलनाडु की ऐतिहासिक ज्ञान परंपरा और इसके समुद्री व्यापारिक महत्व का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल से ही तमिल भूमि भारत की सांस्कृतिक, नैतिक और बौद्धिक विरासत को विश्व तक पहुंचाने का माध्यम रही है। यह भारत की उस सभ्यतागत सोच को दर्शाता है, जो संवाद, सीख और सहयोग पर आधारित रही है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की विकसित भारत @2047 की परिकल्पना का उल्लेख करते हुए श्री राधाकृष्णन ने कहा कि इस लक्ष्य की प्राप्ति में युवाओं की भूमिका निर्णायक है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान, कौशल और नवाचार के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएं।

तेजी से बदलते तकनीकी परिदृश्य पर बोलते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल टेक्नोलॉजी और उभरते नवाचार सभी क्षेत्रों को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे समय में आजीवन सीखने की प्रवृत्ति, निरंतर कौशल उन्नयन और बहुविषयक दृष्टिकोण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने मूल विषयों से आगे बढ़कर नई तकनीकों को अपनाने की सलाह दी।

श्री राधाकृष्णन ने मूल्य आधारित शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि शैक्षणिक उत्कृष्टता तभी सार्थक है जब वह सत्यनिष्ठा, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़ी हो। उन्होंने सफलता और असफलता दोनों को जीवन का अभिन्न अंग बताते हुए विद्यार्थियों को संतुलन, धैर्य और मानसिक दृढ़ता बनाए रखने की सीख दी।

अपने संबोधन के समापन में उपराष्ट्रपति ने स्नातकों से उद्देश्यपूर्ण, सेवाभावी और जिम्मेदार जीवन जीने का आग्रह किया, ताकि व्यक्तिगत सफलता के साथ-साथ देश की सामूहिक प्रगति सुनिश्चित हो सके। इस अवसर पर तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री श्री एम.ए. सुब्रमणियन, संस्थान के कुलाधिपति डॉ. ए.सी. षणमुगम सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।