लेह में जवानों से मिले CJI सूर्य कांत, न्याय सहायता का भरोसा
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लेह आर्मी बेस कैंप में CJI सूर्य कांत का जवानों से संवाद, सैनिकों के त्याग को सराहा और न्यायिक सहायता सुनिश्चित करने का भरोसा दिया।
वीर परिवार सहायता योजना के तहत सैनिकों और उनके परिवारों को मुफ्त कानूनी सहायता, देशभर में सैकड़ों विधिक सेवा क्लीनिक सक्रिय।
Leh/ देश के मुख्य न्यायाधीश Justice Surya Kant ने लद्दाख के Leh में आर्मी बेस कैंप का दौरा कर जवानों से सीधे संवाद किया। यह अपने आप में ऐतिहासिक पहल है, क्योंकि पहली बार किसी मुख्य न्यायाधीश ने सैनिकों के बीच जाकर उनसे बातचीत की है।
अपने संबोधन की शुरुआत उन्होंने ‘जय हिंद’ और लद्दाखी शब्द ‘जुले’ के साथ की, जिसका अर्थ नमस्कार होता है। अपने करीब 12 मिनट के संबोधन में उन्होंने सैनिकों के योगदान को सराहते हुए उन्हें ‘देश के पहरेदार’ बताया। उन्होंने कहा कि देश के नागरिकों की सुरक्षित और शांतिपूर्ण जिंदगी के पीछे सैनिकों का त्याग और समर्पण ही सबसे बड़ी ताकत है।
मुख्य न्यायाधीश ने अपने संबोधन में 1962 के Rezang La Battle का भी उल्लेख किया। उन्होंने मेजर शैतान सिंह भाटी और 13 कुमाऊं रेजिमेंट की चार्ली कंपनी के 114 जवानों के बलिदान को याद करते हुए कहा कि उनका साहस देश के लिए प्रेरणा है।
उन्होंने सैनिकों के सामने आने वाली कानूनी चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती और दुर्गम क्षेत्रों में तैनात सैनिकों के लिए अपने या अपने परिवार के मामलों में न्याय प्राप्त करना आसान नहीं होता। अदालतों और वकीलों तक पहुंचना उनके लिए कठिन होता है, लेकिन यह सुनिश्चित करना न्यायपालिका का कर्तव्य है कि उन्हें भी समान न्याय मिले।
इस संदर्भ में उन्होंने National Legal Services Authority द्वारा चलाई जा रही ‘वीर परिवार सहायता योजना’ की जानकारी दी। इस योजना का उद्देश्य सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करना है।
उन्होंने बताया कि देशभर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से यह सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके तहत 438 विधिक सेवा क्लीनिक स्थापित किए गए हैं और 1,123 सदस्यीय टीम विभिन्न कानूनी मामलों में सहायता कर रही है। दिसंबर 2025 तक करीब 14,929 लोगों को इस योजना का लाभ मिल चुका है।
अपने दो दिवसीय दौरे के दौरान CJI ने लेह और कारगिल में नए जिला अदालत परिसरों का उद्घाटन भी किया। उन्होंने कहा कि लद्दाख जैसे दूरस्थ क्षेत्र भी देश के अभिन्न हिस्से हैं और यहां के नागरिकों तक न्याय पहुंचाना न्यायपालिका की प्राथमिक जिम्मेदारी है।