रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ICG में शामिल किया स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत समुद्र प्रताप
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60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी घटकों से निर्मित यह जहाज आत्मनिर्भर भारत और मेक-इन-इंडिया अभियान की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
उन्नत अग्निशमन, प्रदूषण नियंत्रण और खोज-बचाव क्षमताओं से लैस समुद्र प्रताप हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की समुद्री भूमिका मजबूत करेगा।
Goa/ भारत की समुद्री आत्मनिर्भरता और पर्यावरण सुरक्षा को मजबूती देते हुए रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 5 जनवरी 2026 को गोवा में भारतीय तटरक्षक बल (ICG) में ‘समुद्र प्रताप’ को औपचारिक रूप से शामिल किया। यह गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) द्वारा निर्मित दो प्रदूषण नियंत्रण पोतों में से पहला है और 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी घटकों से बना देश का पहला स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया प्रदूषण नियंत्रण पोत है। साथ ही यह अब तक भारतीय तटरक्षक बल का सबसे बड़ा जहाज भी है।
इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने कहा कि समुद्र प्रताप भारत के परिपक्व रक्षा औद्योगिक इकोसिस्टम और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की जीवंत मिसाल है। उन्होंने बताया कि सरकार जहाज निर्माण में स्वदेशी सामग्री की हिस्सेदारी 90 प्रतिशत तक ले जाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। समुद्र प्रताप को विशेष रूप से समुद्री प्रदूषण नियंत्रण के लिए डिजाइन किया गया है, लेकिन इसकी भूमिका इससे कहीं अधिक व्यापक है।
समुद्र प्रताप में प्रदूषण नियंत्रण, अग्निशमन, खोज एवं बचाव, समुद्री सुरक्षा और कानून प्रवर्तन जैसी बहुआयामी क्षमताएं एक ही प्लेटफॉर्म पर समाहित हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि यह पोत तटीय गश्त और समुद्री निगरानी को मजबूत करेगा तथा भारत के विशाल समुद्री क्षेत्रों में त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि तटरक्षक बल की मजबूत उपस्थिति देश के शत्रुओं को यह संदेश देती है कि समुद्री सीमाओं पर किसी भी दुस्साहस का करारा जवाब दिया जाएगा।
रक्षा मंत्री ने समुद्री पर्यावरण संरक्षण को रणनीतिक आवश्यकता के साथ-साथ नैतिक जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और वैश्विक तापवृद्धि के दौर में तेल रिसाव, प्रदूषण नियंत्रण और तटीय पारिस्थितिकी की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है। समुद्र प्रताप की उन्नत प्रदूषण पहचान प्रणालियां, उच्च क्षमता वाले स्किमर, फ्लोटिंग बूम और विशेष नौकाएं समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करेंगी, जिससे प्रवाल भित्तियों, मैंग्रोव, मत्स्य संसाधनों और समुद्री जैव विविधता की रक्षा होगी।
तकनीकी दृष्टि से यह पोत अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है। इसमें हेलीकॉप्टर हैंगर, उन्नत अग्निशमन प्रणाली, डायनेमिक पोजिशनिंग सिस्टम, इंटीग्रेटेड ब्रिज और प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम शामिल हैं। 4,170 टन विस्थापन, 114.5 मीटर लंबाई और 22 नॉट से अधिक गति वाला यह जहाज 6,000 समुद्री मील तक संचालन में सक्षम है। इसके शस्त्रागार में आधुनिक 30 मिमी और 12.7 मिमी रिमोट नियंत्रित तोपें भी शामिल हैं।
इस जहाज की एक और विशेषता यह है कि पहली बार इसमें दो महिला अधिकारी तैनात की गई हैं। रक्षा मंत्री ने इसे लैंगिक समानता और समावेशी नेतृत्व की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि आज महिलाएं अग्रिम मोर्चे पर योद्धा के रूप में राष्ट्र की सेवा कर रही हैं।
समुद्र प्रताप को कोच्चि में तैनात किया जाएगा और यह तटरक्षक क्षेत्र (पश्चिम) के अंतर्गत परिचालित होगा। कार्यक्रम में गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत, रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह, आईसीजी महानिदेशक परमेश शिवमणि सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। समुद्र प्रताप का शामिल होना भारत को एक जिम्मेदार और सक्षम समुद्री शक्ति के रूप में और मजबूत करता है।